Indore News: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव (एमवाय) चिकित्सालय में बिल्लियों की बेरोकटोक आवाजाही पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने अस्पताल की ओपीडी और संवेदनशील क्षेत्रों में बिल्लियों की मौजूदगी को लेकर सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव को एक सख्त नोटिस जारी किया है।
संक्रमण का बड़ा खतरा और सुरक्षा में चूक
डीन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल के स्टेराइल जोन (जीवाणुमुक्त क्षेत्र), वार्डों और विशेष रूप से HIV/ART जैसे अति-संवेदनशील उपचार केंद्रों में पशुओं का घूमना ‘बायोलॉजिकल रिस्क’ (जैविक जोखिम) की श्रेणी में आता है। प्रशासन ने इसे न केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया है, बल्कि संस्थान की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े किए हैं।
नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) और जैव सुरक्षा मानकों के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एजेंसियों पर गिरेगी गाज, रोजाना देनी होगी रिपोर्ट
डीन ने सुपरिटेंडेंट को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं प्रतिदिन पूरे अस्पताल परिसर का सघन निरीक्षण करें। इसके साथ ही:
जवाबदेही तय करना: हाउसकीपिंग और पेस्ट कंट्रोल के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका की जांच कर उन पर कार्रवाई की जाए।
दैनिक अपडेट: अस्पताल में स्वच्छता और सुरक्षा की क्या स्थिति है, इसकी रिपोर्ट प्रतिदिन डीन कार्यालय को भेजनी होगी।
स्थायी समाधान: भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए एक ‘परमानेंट प्रिवेंटिव एक्शन प्लान’ तैयार कर उसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
विवादों के घेरे में एमवाय प्रशासन
आपको बता दें कि पिछले एक सप्ताह के भीतर सुपरिटेंडेंट को जारी किया गया यह दूसरा नोटिस है। इससे पहले अस्पताल परिसर में फैली गंदगी और सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर भी उनसे जवाब मांगा गया था। उस वीडियो में दो महिलाएं ट्रैफिक के बीच एक स्ट्रेचर पर मरीज को ले जाती दिख रही थीं, जिसे अस्पताल की व्यवस्थाओं में बड़ी चूक माना जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन अब दबाव में है कि वह जल्द से जल्द इन आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाकर मरीजों को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराए।