होली 2026 के अवसर पर हनुमान जी की पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में तैयारी शुरू हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हनुमान आराधना करने से नकारात्मकता से राहत और मनोबल में वृद्धि मानी जाती है। पूजा में खास तौर पर सिंदूर, चमेली का तेल और हनुमान चालीसा का पाठ प्रमुख माना गया है।
परंपरा के मुताबिक, पूजा से पहले घर या मंदिर के पूजा स्थान की साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और दिनभर सात्विक आहार का पालन करते हैं।
पूजा में किन चीजों का रहता है विशेष महत्व
हनुमान पूजा में सिंदूर चढ़ाने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है। साथ ही चमेली के तेल का अर्पण भी किया जाता है। मान्यता है कि यह अर्पण भक्तिभाव और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। कुछ स्थानों पर गुड़-चना, बेसन के लड्डू या मौसमी प्रसाद भी चढ़ाया जाता है।
पूजा के दौरान राम नाम का स्मरण, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। हालांकि पाठ का चयन श्रद्धालु अपनी परंपरा और समय के अनुसार करते हैं। नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ को अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
होली के दिन हनुमान पूजा का सामान्य क्रम
सामान्य रूप से पूजा क्रम में दीप प्रज्वलन, जल अर्पण, सिंदूर और चमेली तेल चढ़ाना, फूल अर्पित करना और चालीसा पाठ शामिल होता है। कई श्रद्धालु आरती के बाद प्रसाद वितरण करते हैं। पूजा के अंत में परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, पूजा करते समय संयमित वाणी और शांत मन पर ध्यान देना चाहिए। अगर मंदिर जाना संभव न हो तो घर में स्थापित हनुमान प्रतिमा या चित्र के सामने भी वही विधि अपनाई जा सकती है।
क्या ध्यान रखें
पूजा सामग्री शुद्ध और साफ रखी जाए। अनावश्यक दिखावे से बचते हुए सरल तरीके से पूजा करना भी उतना ही मान्य माना जाता है। जिन लोगों को विस्तृत विधि की जानकारी न हो, वे संक्षिप्त रूप में दीपक, सिंदूर, तेल और चालीसा पाठ के साथ पूजा कर सकते हैं।
होली जैसे उत्सव पर हनुमान पूजा को कई परिवार आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में भी देखते हैं। इसलिए परंपरा, श्रद्धा और सरलता के साथ किया गया पूजन ही इस अवसर का मुख्य संदेश माना जाता है।