भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में किसान मुद्दों पर कांग्रेस और राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार पूरे साल किसानों के लिए काम कर रही है, जबकि विपक्ष मौके पर आधारित राजनीति कर रहा है। इसी दिन 24 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़ी पांच केंद्रीय-राज्य योजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने का निर्णय भी लिया गया।
सरकार के अनुसार, किसान कल्याण वर्ष के तहत कुल 10,520 करोड़ रुपये की लागत वाली इन योजनाओं को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर लागू रखा जाएगा। निर्णय का सीधा लाभ कृषि, सिंचाई, पोषण, प्राकृतिक खेती और तिलहन उत्पादन से जुड़े किसानों को मिलेगा।
“राहुल गांधी आज आ रहे हैं, हम 365 दिन किसानों के लिए काम कर रहे हैं।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान चौपाल लगाना अच्छी पहल है, लेकिन खेती की बुनियादी समझ भी जरूरी है। उन्होंने रबी और खरीफ फसलों का संदर्भ देते हुए विपक्षी नेतृत्व पर तैयारी के साथ किसान संवाद करने की बात कही। उन्होंने कांग्रेस शासन के वर्षों का उल्लेख करते हुए पूछा कि 2003 तक सिंचाई का रकबा करीब साढ़े सात लाख हेक्टेयर तक सीमित क्यों रहा।
डॉ. यादव ने कहा कि 1956 के बाद लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद कांग्रेस ने राज्य के किसानों के साथ न्याय नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि सिंचाई विस्तार के मामले में पिछली सरकारों की तुलना में मौजूदा सरकार ने कम समय में ज्यादा काम किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश किसानों के लिए अनुकूल राज्य के रूप में विकसित हुआ है।
“राहुल गांधी को अपने कार्यकर्ताओं को डांटना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में हालिया राजनीतिक प्रदर्शन का भी जिक्र किया और कहा कि विरोध दर्ज कराने के दौरान मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में विपक्षी नेतृत्व से संगठनात्मक अनुशासन सुनिश्चित करने की मांग रखी।
कैबिनेट का कृषि पैकेज: 5 योजनाएं, 10,520 करोड़ रुपये
मंत्रिपरिषद के फैसले के मुताबिक पांच प्रमुख योजनाओं को पांच वर्ष के लिए निरंतर जारी रखने की मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए संसाधन, तकनीक और वित्तीय सहायता खेत स्तर तक पहुंचाई जाएगी।
(अ) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना — 2,010 करोड़ रुपये: इस योजना के माध्यम से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति की जाएगी, ताकि उत्पादन और बुनियादी ढांचा दोनों मजबूत हों।
(ब) प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप/माइक्रो इरिगेशन) — 2,400 करोड़ रुपये: किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम लगाने के लिए अनुदान मिलता रहेगा। राज्य का लक्ष्य है कि खेतों में पानी के दक्ष उपयोग को बढ़ाकर सिंचाई विस्तार किया जाए।
(स) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन — 3,300 करोड़ रुपये: धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज और नगदी फसलों से जुड़े किसानों को क्षेत्र विस्तार, उत्पादकता वृद्धि और मिट्टी की उर्वरता सुधार के लिए सहायता दी जाएगी।
(द) नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग — 1,010 करोड़ रुपये: प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल को बढ़ाने पर जोर रहेगा। सरकार का कहना है कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और रसायन-मुक्त खाद्य उपलब्धता को मदद मिलेगी।
(इ) राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयलसीड — 1,800 करोड़ रुपये: तिलहन उत्पादक किसानों को बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पादन समर्थन से लाभ पहुंचाने की योजना है, ताकि खाद्य तेल क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़े।
सरकार का दावा: ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
राज्य सरकार के मुताबिक, 10,520 करोड़ रुपये की इन योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने से कृषि निवेश और ग्रामीण आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सिंचाई, उत्पादकता और प्राकृतिक खेती के संयुक्त ढांचे से खेती की लागत और संसाधन उपयोग के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।
कुल मिलाकर, सोमवार को एक ही मंच पर दो संदेश सामने आए: पहला, किसान मुद्दों पर सियासी टकराव तेज है; दूसरा, सरकार ने कृषि योजनाओं के दीर्घकालिक क्रियान्वयन के लिए वित्तीय और नीतिगत निरंतरता का फैसला किया है। आगामी समय में इन योजनाओं के जमीनी अमल की गति और लाभार्थियों तक पहुंच सबसे महत्वपूर्ण कसौटी रहेगी।