प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय परिसर सेवा तीर्थ में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। बैठक में कुल ₹12,236 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। सरकार के अनुसार कैबिनेट ने कुल आठ अहम फैसले लिए, जिनमें रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और पावर सेक्टर से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
बैठक का सबसे चर्चित फैसला केरल के नाम परिवर्तन प्रस्ताव पर रहा। कैबिनेट ने केरल सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसमें राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव पहले केरल विधानसभा से 24 जून 2024 को पारित हो चुका है।
केरल से केरलम: अब आगे क्या होगा
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा। राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधानों के अनुसार ‘केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026’ को केरल विधानसभा की राय के लिए भेजेंगे। विधानसभा की राय मिलने के बाद केंद्र सरकार बिल को संसद में पेश करेगी। संसद से पारित होने और अंतिम औपचारिक मंजूरी के बाद राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ हो जाएगा।
केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार मलयाली भाषा में राज्य का पारंपरिक नाम ‘केरलम’ है, जबकि हिंदी और अन्य भाषाओं में ‘केरल’ प्रचलित है। प्रस्ताव में कहा गया था कि नाम परिवर्तन से राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत रूप मिलेगा। यह प्रक्रिया ऐसे समय आगे बढ़ी है, जब राज्य में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है।
रेलवे, मेट्रो और एयरपोर्ट पर बड़े निवेश
कैबिनेट ने तीन नए रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से जुड़ी गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन की डबलिंग शामिल है। इसके अलावा झारखंड में गम्हरिया-चांडिल सेक्शन और बिहार में पुनारख-किऊल सेक्शन के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षमता बढ़ाना और माल व यात्री ट्रैफिक की रफ्तार सुधारना है।
कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर एयरपोर्ट के लिए नए टर्मिनल के निर्माण को भी मंजूरी दी। इसके साथ अहमदाबाद मेट्रो के फेज 2B के विस्तार को हरी झंडी दी गई। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से शहरी परिवहन ढांचे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी दोनों को मजबूती मिलेगी।
पावर सेक्टर सुधारों पर भी नीति-स्तर के फैसले
बैठक में बिजली क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर भी नीति संबंधी निर्णय लिए गए। सरकार ने संकेत दिया कि वितरण और आपूर्ति तंत्र को बेहतर करने के लिए सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि विस्तृत स्कीम-वार ब्योरा अलग से जारी किया जाएगा।
इस बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह नई लोकेशन से हुई पहली औपचारिक कैबिनेट बैठक थी। 13 फरवरी को पिछली कैबिनेट बैठक साउथ ब्लॉक स्थित पुराने पीएमओ में हुई थी। उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय नए परिसर में शिफ्ट कर दिया गया।
साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ तक का बदलाव
प्रधानमंत्री कार्यालय 1947 से साउथ ब्लॉक में संचालित होता रहा था। करीब 78 साल तक वही इमारत केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक कामकाज का प्रमुख केंद्र रही। अब यह व्यवस्था नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरित हो चुकी है।
सेवा तीर्थ परिसर में तीन इमारतें हैं। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय है। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय को रखा गया है। सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय है। इससे पहले ये संस्थान अलग-अलग परिसरों से काम करते थे।
नाम परिवर्तन के पिछले उदाहरण
राज्य के नाम में बदलाव का यह पहला मामला नहीं है। 2007 में संसद से बिल पारित होने के बाद ‘उत्तरांचल’ का नाम ‘उत्तराखंड’ किया गया था। उस समय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की मंजूरी के बाद नया नाम लागू हुआ।
इसी तरह 2010 में ‘उड़ीसा’ का नाम बदलकर ‘ओडिशा’ किया गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संबंधित बिल को मंजूरी दी थी। केरल से केरलम का प्रस्ताव भी इसी संवैधानिक ढांचे के तहत आगे बढ़ेगा।