इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन अब जमीन स्तर पर बनेगी, सीएम मोहन यादव ने की घोषणा

मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना की संरचना में अहम बदलाव घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने 25 फरवरी 2026 को कहा कि यह सड़क अब एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में नहीं, बल्कि जमीन स्तर यानी एट-ग्रेड मॉडल पर बनाई जाएगी। इस घोषणा के साथ परियोजना की मूल निर्माण पद्धति में स्पष्ट परिवर्तन दर्ज हो गया है।

इंदौर और उज्जैन के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित इस ग्रीनफील्ड मार्ग को पहले एलिवेटेड स्वरूप में बनाने की चर्चा थी। अब सरकार ने एट-ग्रेड निर्माण पर सहमति जताई है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आगे का काम उसी डिजाइन सिद्धांत पर आगे बढ़ेगा, जिसमें सड़क सीधे भूमि स्तर पर विकसित की जाती है।

सरकारी स्तर पर की गई घोषणा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में एलाइनमेंट, संरचनात्मक डिजाइन और निर्माण रणनीति एक-दूसरे से सीधे जुड़ी होती हैं। एलिवेटेड और जमीन स्तर के मॉडल में तकनीकी और क्रियान्वयन संबंधी प्रक्रियाएं अलग होती हैं। ऐसे में इस निर्णय को परियोजना की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

क्या बदला, सरल भाषा में समझें

घोषित बदलाव का सीधा अर्थ यह है कि प्रस्तावित फोरलेन मार्ग को ऊंचे पिलरों पर उठाकर नहीं बनाया जाएगा। अब सड़क को भूमि स्तर पर विकसित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य इंदौर और उज्जैन के बीच बेहतर, व्यवस्थित और तेज सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है, लेकिन निर्माण का ढांचा अब पहले से अलग रहेगा।

ग्रीनफील्ड सड़क का सामान्य अर्थ नई एलाइनमेंट पर नया मार्ग तैयार करना होता है। यह मौजूदा सड़क के विस्तार से अलग मॉडल है। इंदौर-उज्जैन फोरलेन के मामले में भी चर्चा इसी श्रेणी की परियोजना को लेकर है, जिसमें निर्माण पद्धति पर सरकार की ताजा घोषणा निर्णायक मानी जा रही है।

घोषणा का प्रशासनिक और तकनीकी असर

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद परियोजना से जुड़े विभागों को आगे की तैयारी अब जमीन स्तर के प्रारूप के अनुसार करनी होगी। इस तरह के बदलाव में ड्रॉइंग, डिजाइन और संबंधित स्वीकृतियों की प्रक्रिया उसी मॉडल के हिसाब से आगे बढ़ती है, जिसे सरकार अंतिम रूप देती है। 25 फरवरी 2026 की घोषणा ने यही आधार तय कर दिया है।

इंदौर और उज्जैन, दोनों ही राज्य के प्रमुख शहरी और धार्मिक केंद्र हैं। इनके बीच सड़क संपर्क को लेकर लंबे समय से बेहतर ढांचे की मांग रही है। ग्रीनफील्ड फोरलेन को उसी व्यापक कनेक्टिविटी ढांचे के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। ताजा निर्णय ने अब इस परियोजना की भौतिक संरचना को लेकर अनिश्चितता कम की है।

राज्य स्तर की प्राथमिकता में परियोजना

प्रदेश सरकार ने जिस स्तर पर इस परियोजना को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है, उससे संकेत मिलता है कि इंदौर-उज्जैन मार्ग को अवसंरचना प्राथमिकताओं में रखा गया है। एलिवेटेड विकल्प से हटकर जमीन स्तर का चयन राज्य की घोषित निर्माण दिशा को दर्शाता है।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी का मुख्य बिंदु यही है कि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन अब एट-ग्रेड बनेगी। आगे के चरणों में परियोजना से जुड़े तकनीकी, प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी बिंदु संबंधित विभागों की प्रक्रिया के अनुसार सामने आएंगे।