सहारा घोटाला: 6,689 करोड़ की गड़बड़ी का खुलासा, 300 करोड़ लौटाए गए, विधानसभा में मंत्री का बयान

मध्य प्रदेश विधानसभा में सहारा इंडिया से जुड़े निवेशकों के रिफंड, एफआईआर और संपत्तियों के मुद्दे पर बुधवार को विस्तृत जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से अधिकृत राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने सदन में बताया कि राज्य के 9,06,661 से अधिक निवेशकों ने सहारा इंडिया में कुल 6,689 करोड़ रुपये का निवेश किया था। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप अब तक करीब साढ़े सात लाख आवेदनों का निराकरण हो चुका है और सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से 355 करोड़ रुपये छोटे निवेशकों को वितरित किए जा चुके हैं।

सदन में यह मुद्दा धार जिले के मनावर क्षेत्र से विधायक डॉ. हिरालाल अलावा के सवाल के दौरान उठा। जवाब में सरकार ने निवेशकों की संख्या, रिफंड प्रक्रिया और चल रही जांच का ब्यौरा रखा। सरकार का कहना है कि रिफंड की पूरी प्रक्रिया उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका के आधार पर बने पोर्टल के अनुसार ही आगे बढ़ रही है।

प्रश्न बदले जाने पर सदन में आपत्ति

चर्चा के दौरान राज्यमंत्री ने बताया कि 1 जनवरी 2024 से अब तक सहारा से जुड़े मामलों में चार एफआईआर दर्ज हुई हैं। इस पर विधायक जयवर्धन सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका प्रश्न बदला गया है। जवाब में विभागीय मंत्री ने कहा कि प्रश्न नहीं बदला गया, बल्कि विधानसभा सचिवालय से परिवर्तन के दौरान 1 जनवरी 2024 की तिथि निर्धारित की गई। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि इस अवधि की सभी एफआईआर को पुलिस स्टेशन कोतवाली, जिला मुरैना से संबद्ध किया गया है और संयुक्त रूप से विवेचना जारी है।

“प्रश्न नहीं बदला है। विधानसभा सचिवालय से परिवर्तित हुआ है और इसमें तिथि 1 जनवरी 2024 तय की गई।” — विभागीय मंत्री

सरकार ने दोहराया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 9,06,661 आवेदन प्राप्त हुए और इनमें से लगभग साढ़े सात लाख आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। निवेशकों की मूल राशि 6,689 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि छोटे निवेशकों को पोर्टल के जरिए 355 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।

सहारा संपत्तियों पर आरोप और सरकार का जवाब

सदन में जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि सहारा की संपत्तियां नेताओं द्वारा खरीदी जा रही हैं। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सहारा से संबंधित संपत्तियों की प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए सीधे तौर पर यह कहना कि संपत्ति किसी नेता के पास चली गई, तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।

“विषय न्यायालय में विचाराधीन है। उनकी संपत्तियां ऑनलाइन हैं, इसलिए सीधे कहना कि किसी नेता के पास है, ऐसा नहीं है।” — कैलाश विजयवर्गीय

विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि यदि किसी संपत्ति की नीलामी हो रही है, तो वह भी उच्चतम न्यायालय के अधीन प्रक्रिया के तहत ही हो रही है। यानी संपत्ति निस्तारण और नीलामी का ढांचा न्यायिक निगरानी में संचालित बताया गया।

ईओडब्ल्यू की कार्रवाई का विवरण

सदन में यह जानकारी भी दी गई कि ईओडब्ल्यू ने 20 जनवरी 2025 को आशुतोष मनु दीक्षित की शिकायत के आधार पर सहारा जमीन घोटाले से संबंधित मामला लिया। इसके बाद 25 जुलाई 2025 को सीमातों राय, जेबी राय और ओपी श्रीवास्तव के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। सरकार की ओर से यह बिंदु भी स्पष्ट किया गया कि जांच एजेंसियां संबंधित शिकायतों को अलग-अलग नहीं, बल्कि परस्पर संबद्ध तथ्यों के साथ देख रही हैं।

कुल मिलाकर सरकार का पक्ष यह रहा कि एक ओर बड़े पैमाने पर आवेदनों का निपटारा हुआ है, दूसरी ओर रिफंड की प्रक्रिया न्यायालय निर्देशित पोर्टल से चल रही है। साथ ही आपराधिक शिकायतों पर एफआईआर और ईओडब्ल्यू जांच दोनों ट्रैक पर कार्रवाई जारी है। सदन में उठे आरोपों के बीच सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया, ऑनलाइन रिकॉर्ड और चल रही विवेचना का हवाला देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की।