Share Market Update: हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को घरेलू इक्विटी बाजार ने मजबूत शुरुआत दर्ज की। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 200 अंक यानी 0.27 फीसदी चढ़कर 82,418 के स्तर पर पहुंचा।
वहीं एनएसई निफ्टी 70 अंक यानी 0.31 फीसदी की बढ़त के साथ 25,537 पर कारोबार करता दिखा। निफ्टी ने 25,000 के ऊपर अपनी स्थिति बनाए रखी, जिसे तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण स्तर माना जाता है।
प्री-ओपन संकेतों में भी तेजी का रुख दिखा। GIFT Nifty 25,645 के आसपास ट्रेड करता नजर आया, जिससे भारतीय बाजार के लिए शुरुआत में पॉजिटिव संकेत मिले। ट्रेडिंग के दौरान निवेशकों की नजर एशियाई बाजारों की चाल, अमेरिकी बाजारों के संकेत, रुपये की दिशा और कच्चे तेल समेत अन्य कमोडिटी कीमतों पर रहने की संभावना है।
एशियाई बाजारों में व्यापक बढ़त
गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखे। जापान का निक्केई 225 करीब 1.1 फीसदी उछलकर 59,199.31 के रिकॉर्ड हाई स्तर पर पहुंचा। जापान का ही टॉपिक्स इंडेक्स 1.45 फीसदी मजबूत रहा।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.65 फीसदी और कोस्डैक 0.57 फीसदी चढ़ा। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी 0.8 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।
एशियाई बाजारों की इस चाल में अमेरिकी बाजारों की रातभर की तेजी का असर साफ नजर आया। ग्लोबल संकेत मजबूत रहने पर भारतीय बाजार में शुरुआती घंटों में खरीदारी का रुझान बढ़ता है, खासकर उन सेक्टरों में जो वैश्विक जोखिम धारणा से सीधे प्रभावित होते हैं।
वॉल स्ट्रीट से मिला सपोर्ट
25 फरवरी को अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। S&P 500 इंडेक्स 0.81 फीसदी बढ़कर 6,946.13 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 1.26 फीसदी चढ़कर 23,152.08 पर पहुंचा। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.63 फीसदी ऊपर गया और 307.65 अंक की तेजी के साथ 49,482.15 पर बंद हुआ।
अमेरिकी बाजारों में यह मजबूती वैश्विक निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को दर्शाती है। इसका असर एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार के शुरुआती सेंटीमेंट पर भी पड़ा। आम तौर पर जब वॉल स्ट्रीट में टेक और ब्लूचिप शेयरों में साथ-साथ तेजी दिखती है, तो अगले कारोबारी दिन एशिया में जोखिम परिसंपत्तियों में खरीदारी बढ़ती है।
रुपया, क्रूड और कमोडिटी पर फोकस
दिन के कारोबार में सिर्फ इक्विटी संकेत ही नहीं, बल्कि करेंसी और कमोडिटी चाल भी अहम रहेगी। रुपये की मजबूती या कमजोरी का असर आयात-निर्यात आधारित कंपनियों पर पड़ता है।
इसी तरह कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से ऊर्जा, परिवहन और उपभोक्ता लागत पर असर की उम्मीद रहती है। धातु और अन्य कमोडिटी कीमतों में बदलाव से मेटल, मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल गुड्स शेयरों की दिशा प्रभावित हो सकती है।
बाजार प्रतिभागी इन संकेतकों को दिनभर ट्रैक करते हैं, क्योंकि शुरुआती तेजी के बाद मुनाफावसूली, सेक्टर रोटेशन और ग्लोबल डेटा रिलीज के आधार पर सूचकांकों की चाल बदल सकती है। इसलिए ओपनिंग ट्रेंड के साथ इंट्राडे वोलैटिलिटी भी प्रमुख कारक बनी रहती है।
संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से मिला आधार
प्रोविजनल एक्सचेंज डेटा के मुताबिक 25 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार में 2,991.64 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 5,118.57 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। दोनों श्रेणियों की खरीदारी ने बाजार को मांग का आधार दिया, जिससे ऊंचे स्तरों पर भी सेंटीमेंट को समर्थन मिला।
संस्थागत निवेशकों की इस गतिविधि को बाजार की दिशा के लिए अहम संकेत माना जाता है। जब घरेलू और विदेशी दोनों तरफ से खरीदारी दर्ज होती है, तो इंडेक्स में गिरावट की स्थिति में भी सपोर्ट बनने की संभावना बढ़ती है। मौजूदा सत्र में शुरुआती तेजी के पीछे यह एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि कारक रहा।
कुल मिलाकर, गुरुवार की शुरुआत में घरेलू बाजार ने ग्लोबल संकेतों और संस्थागत प्रवाह के दम पर मजबूती दिखाई। सेंसेक्स 82,418 और निफ्टी 25,537 के स्तर तक पहुंचने के साथ फोकस अब इस बात पर रहेगा कि दिनभर की ट्रेडिंग में यह बढ़त कितनी टिकाऊ रहती है।