हिंदी भाषा और साहित्य के लिए काम करने वाले मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने रविवार को प्रेस क्लब में काव्य गौरव अलंकरण समारोह आयोजित किया। समारोह में वर्ष 2026 का काव्य गौरव अलंकरण उज्जैन की कवियित्री सुश्री निशा पंडित जोशी को प्रदान किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, अकादमिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
संस्थान ने सम्मान घोषणा के साथ यह भी रेखांकित किया कि निशा पंडित जोशी कविता और साहित्य लेखन के साथ पत्रकारिता में भी सक्रिय हैं। वह दैनिक संयुक्त लहर समाचार पत्र का उज्जैन से संपादन करती हैं। इसके साथ ही वे इंदौर की सामाजिक संस्था मीनाक्षी सेवा समिति में सचिव पद की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
मीनाक्षी सेवा समिति ने इस सम्मान को संस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। समिति से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, साहित्य और सामाजिक सेवा में सक्रिय व्यक्तित्व का राष्ट्रीय स्तर के मंच पर सम्मानित होना संगठन के कार्यों को नई पहचान देता है।
मुख्य अतिथि और अध्यक्षता
समारोह के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता देअ विवि के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने की। भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंच से हिंदी साहित्य, समकालीन लेखन और मातृभाषा के प्रसार से जुड़े विषयों पर चर्चा भी हुई।
स्वागत, उद्बोधन और संचालन
अतिथियों का स्वागत नितेश गुप्ता, डॉ. नीना जोशी, पारस बिरला, राजेश यादव, विलास राणे, मणिमाला शर्मा, प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी और श्याम कामले ने किया। स्वागत उद्बोधन डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिलेश राव ने किया। अभिनंदन पत्र का वाचन आशीष पंवार और चेतन जोशी ने किया।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का प्रारूप साहित्यिक गरिमा और औपचारिक अनुशासन के साथ रखा गया। मंच संचालन में सम्मान घोषणा, अतिथि परिचय, अभिनंदन-पत्र वाचन और उपस्थिति दर्ज कराने की पारंपरिक प्रक्रिया का पालन किया गया।
साहित्य और समाज से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति
समारोह में अरविंद तिवारी, पुरुषोत्तम दुबे, योगेन्द्रनाथ शुक्ल, डॉ. पद्मा सिंह, जयंत भिसे और मीनाक्षी सेवा समिति के अध्यक्ष बलराम सोनी उपस्थित रहे। इनके साथ हरेराम वाजपेयी, जय सिंह रघुवंशी, संध्या रॉय चौधरी, डॉ. सुनीता फड़नीस, डॉ. सुशीम पगारे और लक्ष्मीकांत पंडित ने भी सहभागिता की।
कार्यक्रम में डॉ. अनुपमा समाधिया, विनीता तिवारी, विश्वनाथ कदम, डॉ. अनुपमा छाजेड़, अभय तिवारी, मॉर्टिन पिंटो, धर्मेश यशलहा, डॉ. अरुण सिर्वी, प्रशांत राव चोरसे, सौरव गौसर, संजय पंजवानी, सुरेखा सिसौदिया और रमेशचन्द्र शर्मा सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे। आयोजकों ने प्रतिभागियों की उपस्थिति को समारोह की व्यापक स्वीकार्यता से जोड़ा।
सम्मान का संदर्भ और महत्व
काव्य गौरव अलंकरण का यह संस्करण हिंदी के सक्रिय रचनाकारों को मंच देने की श्रृंखला का हिस्सा रहा। इस बार सम्मान ऐसे व्यक्तित्व को मिला, जो साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक दायित्व—तीनों क्षेत्रों में कार्यरत हैं। आयोजकों ने इसे मातृभाषा के पक्ष में निरंतर काम कर रहे रचनात्मक समुदाय के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
समारोह के समापन पर अतिथियों और सहभागी संस्थाओं ने हिंदी लेखन के विस्तार, नई पीढ़ी में भाषा के प्रति रुचि और सामाजिक सरोकारों से जुड़े साहित्य के प्रसार पर जोर दिया। इसी क्रम में निशा पंडित जोशी का सम्मान कार्यक्रम का केंद्रीय बिंदु रहा, जिसे उपस्थित जनों ने औपचारिक रूप से सराहा।