इंदौर शहर के बायपास पर चल रहे हवाई रेस्टोरेंट के संचालन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई बुधवार को डिविजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने नोटिस जारी किए हैं और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
यह याचिका एडवोकेट चर्चित शास्त्री की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि जिस तरह से लोगों को काफी ऊंचाई पर बैठाकर सेवा दी जा रही है, वह सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था को यात्रियों और ग्राहकों की जान के लिए जोखिमपूर्ण बताया है।
याचिका में क्या कहा गया
याचिका में हवाई रेस्टोरेंट को “मौत का झूला” बताते हुए दावा किया गया है कि इस तरह की व्यवस्था में तकनीकी और आपात सुरक्षा का पर्याप्त प्रबंध अनिवार्य होना चाहिए। याचिका के अनुसार, देश में इसी तरह के तीन स्थानों पर हादसों के बाद ऐसे होटल/रेस्टोरेंट बंद किए जा चुके हैं। इसी आधार पर इंदौर के बायपास पर चल रहे संचालन की वैधानिकता और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग की गई है।
“यह मौत का झूला है, लोगों को काफी ऊंचाई पर ले जाकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।” — याचिका में दर्ज पक्ष
याचिकाकर्ता की दलील का केंद्र बिंदु सार्वजनिक सुरक्षा है। याचिका में कहा गया है कि जब किसी गतिविधि में बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हों और उसमें ऊंचाई, यांत्रिक संचालन या आकस्मिक जोखिम मौजूद हों, तो नियामकीय मंजूरी, नियमित निरीक्षण और आपदा प्रतिक्रिया जैसे मानक स्पष्ट होने चाहिए।
अदालत की मौजूदा कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
डिविजन बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी कर दिया है। इसका मतलब है कि अब संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि संचालन किस नियम के तहत हो रहा है, सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या हैं और प्रशासनिक स्तर पर कौन-सी स्वीकृतियां दी गई हैं।
फिलहाल अदालत ने अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामला विचाराधीन है और आगे की सुनवाई के बाद ही किसी तरह की रोक, शर्त या अन्य निर्देश पर फैसला होगा। इस बीच याचिका ने शहर में संचालित ऐसे आकर्षण आधारित व्यावसायिक मॉडलों की सुरक्षा व्यवस्था को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
मामले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह सिर्फ एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे अनुभव-आधारित रेस्टोरेंट प्रारूपों की निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ता है। अदालत के अगले कदम पर अब प्रशासन, संचालक और आम नागरिकों की नजर रहेगी।