भोपाल में संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों के लिए अहम प्रशासनिक फैसला लिया गया है। शहर में रजिस्ट्री कामकाज 31 मार्च तक शनिवार और रविवार को भी जारी रहेगा। इसके साथ ही यह साफ कर दिया गया है कि 1 अप्रैल से नई गाइडलाइन दरें लागू होंगी, जिसके बाद संपत्तियों का मूल्यांकन और उससे जुड़ा शुल्क नए ढांचे के अनुसार लगेगा।
वित्तीय वर्ष के समापन से पहले आम तौर पर रजिस्ट्री दफ्तरों में काम का दबाव बढ़ता है। इस बार भी बड़ी संख्या में लोग मौजूदा दरों पर दस्तावेज दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से सप्ताहांत में कार्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है, ताकि लंबित मामलों का निपटारा समय पर हो सके और आवेदकों को अतिरिक्त कार्यदिवस मिल सकें।
इस निर्णय का सीधा असर उन खरीदारों और विक्रेताओं पर पड़ेगा, जिन्होंने लेनदेन की प्रक्रिया पूरी कर ली है लेकिन अंतिम रजिस्ट्री बाकी है। 31 मार्च तक पुराने ढांचे के अनुसार मूल्यांकन का लाभ मिलेगा। 1 अप्रैल के बाद नई दरें लागू होने से संपत्ति की श्रेणी, स्थान और मूल्यांकन के आधार पर देय राशि में बदलाव संभव है।
क्यों महत्वपूर्ण है 31 मार्च की समयसीमा
मध्य प्रदेश में गाइडलाइन दरें संपत्ति के न्यूनतम मूल्यांकन का आधार होती हैं। स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क की गणना इसी मूल्यांकन से जुड़ी रहती है। ऐसे में दरों में संशोधन होने पर कुल लेनदेन लागत बदल सकती है। 31 मार्च तक पुरानी दरें प्रभावी रहने से कई पक्ष समयसीमा से पहले दस्तावेज पंजीकृत कराने का प्रयास करते हैं।
कार्यालयों के शनिवार-रविवार खुले रहने से उन लोगों को सुविधा मिलेगी जो कार्यदिवस में दफ्तर नहीं पहुंच पाते। इससे आवेदन की संख्या को विभाजित करने और भीड़ प्रबंधन में भी प्रशासन को मदद मिलने की उम्मीद है।
1 अप्रैल से क्या बदलेगा
1 अप्रैल से लागू होने वाली नई गाइडलाइन दरें संपत्तियों के आधिकारिक मूल्यांकन को अपडेट करेंगी। इसका असर आवासीय, वाणिज्यिक और अन्य श्रेणियों की रजिस्ट्री लागत पर अलग-अलग दिख सकता है। जिन दस्तावेजों का पंजीयन 1 अप्रैल के बाद होगा, उन्हें नई दरों के अनुसार ही प्रोसेस किया जाएगा।
व्यवहारिक तौर पर इसका मतलब यह है कि सौदे का मूल्य तय होने के बाद भी रजिस्ट्री की तारीख बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। दस्तावेज तैयार, भुगतान और अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया में देरी होने पर लाभ-हानि का अंतर बन सकता है। इसलिए संबंधित पक्षों को समयसीमा के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने की सलाह दी जा रही है।
आवेदकों के लिए क्या ध्यान रखना जरूरी
रजिस्ट्री के लिए जाने से पहले पक्षकारों को अपने दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए। पहचान संबंधी प्रमाण, संपत्ति के कागजात, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य अनिवार्य अभिलेख पूरे होने चाहिए। अपूर्ण फाइल होने पर समयसीमा के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।
वीकेंड पर कामकाज बढ़ने से नागरिकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनकी बुकिंग, स्लॉट या कार्यालयी निर्देश पहले से स्पष्ट हों। अंतिम दिनों में दबाव बढ़ने पर प्रतीक्षा समय ज्यादा हो सकता है, इसलिए समय से पहले तैयारी करना बेहतर रहता है।
प्रशासनिक स्तर पर यह कदम वित्तीय वर्ष के अंत में रजिस्ट्री तंत्र को अतिरिक्त क्षमता देने के रूप में देखा जा रहा है। जिन लोगों की रजिस्ट्री लंबित है, उनके लिए यह 31 मार्च तक का अवसर है। इसके बाद 1 अप्रैल से नई दरों के साथ संपत्ति पंजीयन का नया चक्र शुरू होगा।