Holi 2026: धुलेंडी पर बेफिक्र रंगों की बरसात, पहले प्रहर में ग्रहण का सूतक प्रभावी नहीं

उज्जैन में होली 2026 को लेकर चल रही ग्रहण और सूतक की चर्चा के बीच धार्मिक गणना के आधार पर स्थिति स्पष्ट की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पहले प्रहर में लगने वाला सूतक मान्य नहीं माना गया है। इसी कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में परंपरागत समय पर होलिका दहन के बाद रंग-गुलाल का उत्सव सामान्य रूप से मनाने की तैयारी जारी है।

धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान सूतक का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन उसका पालन ग्रहण के प्रकार, समय और पर्व के मुहूर्त से जुड़ी शर्तों के आधार पर तय किया जाता है। उज्जैन में होली को लेकर जो स्थिति सामने आई है, उसमें पहले प्रहर का सूतक लागू न होने की बात कही गई है। इससे सुबह और दिन के उत्सवी कार्यक्रमों पर अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हुई है।

स्थानीय स्तर पर परिवारों और मोहल्लों में होली की तैयारियां पहले से चल रही थीं। ग्रहण और सूतक को लेकर बनी शंका के कारण कई लोग पूजा, होलिका दहन और धूलेंडी के समय को लेकर जानकारी ले रहे थे। अब स्पष्टता आने के बाद पारंपरिक रूप से एक-दूसरे को गुलाल लगाने, सामुदायिक मिलन और धार्मिक विधियों के कार्यक्रम सामान्य तरीके से होने की उम्मीद है।

पहले प्रहर का सूतक क्यों बना चर्चा का विषय

होली जैसे बड़े पर्व पर सूतक की स्थिति सीधे तौर पर पूजा-अर्चना और सार्वजनिक उत्सव को प्रभावित करती है। इसी वजह से इस बार लोगों ने पहले से पंचांग स्थिति और ग्रहण समय की जानकारी जुटाई। उपलब्ध विवरण में यह बताया गया कि पहले प्रहर का सूतक मान्य नहीं माना जा रहा है। इस निष्कर्ष ने पर्व के आयोजन को लेकर बनी उलझन को कम किया है।

उज्जैन जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर में पंचांग और मुहूर्त को लेकर आम तौर पर सावधानी रखी जाती है। मंदिरों, धर्माचार्यों और परिवारों में निर्णय अक्सर समय-गणना के आधार पर होते हैं। ऐसे में सूतक की वैधता पर आई स्पष्टता को होली आयोजन के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

होलिका दहन और रंगोत्सव पर व्यावहारिक असर

ग्रहण से जुड़े प्रश्न सामने आने पर सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या रंग खेलने का समय प्रभावित होगा। पहले प्रहर में सूतक अमान्य माने जाने से उत्सव की मुख्य गतिविधियों को जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है। लोग पारंपरिक विधि से होली पूजन, होलिका दहन और अगले दिन रंगोत्सव की तैयारी कर रहे हैं।

कई स्थानों पर सामुदायिक स्तर पर होली मिलन के कार्यक्रम पहले से तय रहते हैं। समय को लेकर असमंजस होने पर आयोजक तिथियों और अवधि में बदलाव पर विचार करते हैं। इस बार स्थिति स्पष्ट होने से कार्यक्रमों के स्थगन या बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

धार्मिक पालन और सामाजिक उत्सव साथ-साथ

होली के अवसर पर आमतौर पर दो स्तरों पर गतिविधियां चलती हैं। एक ओर धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-विधि होती है, दूसरी ओर सामाजिक मेल-मिलाप और रंगोत्सव। उज्जैन में सामने आई समय-स्पष्टता से दोनों पक्ष संतुलित तरीके से निभाने की स्थिति बनी है।

परिवार स्तर पर भी लोग पहले पूजा, फिर उत्सव की परंपरा का पालन करते हैं। सूतक को लेकर स्पष्ट राय आने के बाद तैयारी में सहजता लौटी है। बाजारों में गुलाल, पूजा सामग्री और उत्सवी सामान की खरीद भी इसी भरोसे के साथ आगे बढ़ती दिख रही है कि पर्व का मुख्य स्वरूप बना रहेगा।

कुल मिलाकर होली 2026 को लेकर उज्जैन में प्रमुख संदेश यही है कि पहले प्रहर का सूतक मान्य न होने से पर्व मनाने पर व्यापक रोक जैसी स्थिति नहीं बनती। धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए रंग और उल्लास के साथ होली मनाने का रास्ता खुला है।