Share Market: शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और 4 पैसे गिरकर 90.95 पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.91 पर खुला था, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ इसमें नरमी आई। घरेलू इक्विटी बाजार में शुरुआती गिरावट और विदेशी पूंजी की निकासी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।
पिछले कारोबारी दिन गुरुवार को रुपया 90.91 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ था। उससे पहले बुधवार को भी रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 90.91 पर बंद हुआ था। यानी हाल के सत्रों में मुद्रा सीमित दायरे में रही, लेकिन शुक्रवार को शुरुआती रुझान फिर कमजोर दिखा।
मुद्रा बाजार में दबाव के बीच दो वैश्विक संकेत राहत देने वाले रहे। डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताता है, 0.09% गिरकर 97.70 पर रहा। वहीं अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.07% फिसलकर 70.70 डॉलर प्रति बैरल पर आया। इन दोनों कारकों ने रुपये की गिरावट को और गहरा होने से रोका।
घरेलू बाजार की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव
शुक्रवार को शेयर बाजार की शुरुआत भी कमजोर रही। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 364.62 अंक गिरकर 81,883.99 पर आ गया। एनएसई निफ्टी 50 भी 117.15 अंक फिसलकर 25,379.40 पर पहुंच गया। इक्विटी बाजार में यह गिरावट निवेशक जोखिम लेने की क्षमता पर असर डालती है और इसका असर अक्सर मुद्रा बाजार में भी दिखता है।
शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को 3,465.99 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह बिकवाली रुपये के लिए नकारात्मक संकेत मानी जा रही है, क्योंकि विदेशी निवेशकों की निकासी से डॉलर की मांग बढ़ती है और स्थानीय मुद्रा पर दबाव आता है।
वैश्विक संकेतों पर बाजार की नजर
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार शुल्क को लेकर अनिश्चितता के बीच रुपये का रुख नकारात्मक रह सकता है। उनके अनुसार, निकट अवधि में बाजार जिनेवा में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता के संकेतों और अमेरिका से आने वाले रोजगार आंकड़ों पर फोकस रखेगा।
विशेषज्ञ आकलन के अनुसार डॉलर-रुपया हाजिर दर 90.60 से 91.20 के दायरे में रह सकती है। यह दायरा बताता है कि बाजार फिलहाल किसी एकतरफा बड़े मूव की बजाय खबर-आधारित उतार-चढ़ाव देख रहा है। यदि विदेशी निवेश का रुख और शेयर बाजार की दिशा कमजोर रहती है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
रुपये की चाल में किन कारकों का असर दिखा
मौजूदा कारोबारी सत्र में तीन प्रमुख कारक साथ-साथ दिखे। पहला, विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली ने घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों से पूंजी निकासी का संकेत दिया। दूसरा, सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत नकारात्मक रही, जिससे बाजार भावनाओं में सावधानी बढ़ी। तीसरा, डॉलर इंडेक्स और ब्रेंट में हल्की गिरावट ने रुपये को सीमित सहारा दिया।
इन संकेतों का संयुक्त असर यह रहा कि रुपया दिन की शुरुआत में ही दबाव में आ गया, लेकिन गिरावट तेज नहीं हुई। निकट अवधि में मुद्रा बाजार की दिशा घरेलू इक्विटी प्रवाह, वैश्विक जोखिम संकेत और अमेरिका से आने वाले मैक्रो डेटा पर निर्भर रहने की संभावना है। फिलहाल बाजार सहभागियों के लिए 90.60-91.20 का दायरा प्रमुख संकेतक बना हुआ है।