मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान में आज बोत्सवाना से 8 चीतों का नया दल पहुंचने वाला है। अधिकारियों के अनुसार इन चीतों के आने के बाद भारत में मौजूद चीतों की कुल संख्या में बढ़ोतरी दर्ज होगी। यह ट्रांसलोकेशन राष्ट्रीय स्तर पर चल रही चीता पुनर्स्थापन योजना का अगला महत्वपूर्ण चरण है।
कुनो में आगमन के लिए वन विभाग और परियोजना से जुड़े तकनीकी दलों ने व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। अंतरराष्ट्रीय स्थानांतरण के बाद वन्यजीवों को निर्धारित पशु-चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत रखा जाता है। शुरुआती चरण में स्वास्थ्य परीक्षण, व्यवहारिक निगरानी और अनुकूलन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि नए आवास में उनकी सुरक्षित स्थापना हो सके।
अधिकारियों की योजना के मुताबिक नए चीतों को पहले नियंत्रित बाड़ों में रखा जाएगा। इसके बाद उनकी फिटनेस, शिकार क्षमता और क्षेत्रीय अनुकूलन का आकलन किया जाएगा। आवश्यक मानक पूरे होने पर उन्हें चरणबद्ध तरीके से बड़े क्षेत्र में छोड़ा जाता है। चीता परियोजना में यह प्रक्रिया पहले भी अपनाई जा चुकी है।
चीता परियोजना का अगला चरण
भारत में चीतों की वापसी का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक स्थिर और दीर्घकालिक आबादी विकसित करना भी है। विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि नई आनुवंशिक विविधता, पर्याप्त शिकार आधार और सुरक्षित आवास, तीनों कारक साथ होने चाहिए। बोत्सवाना से आने वाला दल इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
परियोजना के तहत निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया गया है। संरक्षित क्षेत्र में गश्त, मूवमेंट ट्रैकिंग, चिकित्सा सहायता और मानव-वन्यजीव समन्वय पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कुनो पर राष्ट्रीय फोकस होने के कारण यहां प्रबंधन व्यवस्था को बहुस्तरीय रूप में विकसित किया गया है।
पृष्ठभूमि: पहले भी विदेश से लाए गए थे चीते
इससे पहले सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। इन दोनों चरणों के जरिए कुनो में चीता पुनर्स्थापन की शुरुआत हुई थी। अब बोत्सवाना से आने वाला नया समूह उसी प्रक्रिया की निरंतरता है।
भारत में चीता दशकों पहले विलुप्त घोषित किया गया था। मौजूदा कार्यक्रम का लक्ष्य उपयुक्त पारिस्थितिक तंत्र में इस प्रजाति की फिर से स्थापना करना है। इसी कारण देश में चीता संरक्षण को केवल एक वन्यजीव स्थानांतरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पारिस्थितिक परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान में नए चीतों के आगमन के बाद निगरानी और प्रबंधन का दबाव भी बढ़ेगा। हालांकि परियोजना से जुड़े अधिकारी पहले से यह रुख स्पष्ट करते रहे हैं कि जल्दबाजी के बजाय चरणबद्ध, वैज्ञानिक और सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। आने वाले हफ्तों में चीतों के स्वास्थ्य और व्यवहार के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
फिलहाल सबसे अहम तथ्य यह है कि आज होने वाला यह स्थानांतरण भारत में चीता आबादी बढ़ाने की दिशा में एक और ठोस कदम है। कुनो अब भी इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का केंद्र बना हुआ है, और बोत्सवाना से आने वाले 8 चीतों पर देश-विदेश के वन्यजीव समुदाय की नजर रहेगी।