केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, इस खास कोर्स में EWS वर्ग की सीटें बढ़ीं, हजारों छात्रों को मिलेगा लाभ

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर में मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (MDS) पाठ्यक्रम के लिए सीट वृद्धि को मंजूरी दी है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चार विभागों में एक-एक अतिरिक्त सीट स्वीकृत की है। महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह सभी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित रहेंगी।

इस निर्णय के बाद संस्थान में डेंटल पीजी स्तर पर EWS अभ्यर्थियों के लिए अवसर बढ़ेंगे। कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि यह स्वीकृति डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की सिफारिशों और महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा के बाद जारी की गई है।

किन विभागों में बढ़ीं सीटें

मंत्रालय की अनुमति के अनुसार कुल चार विभागों में एक-एक सीट बढ़ाई गई है। इनमें ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडोंटिक्स, पीडियाट्रिक एंड प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री, और ओरल पैथोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी शामिल हैं। इस तरह कुल चार नई सीटें जोड़ी गई हैं, और सभी EWS श्रेणी के लिए निर्धारित की गई हैं।

“केंद्र सरकार ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की सिफारिशों और कॉलेज के दस्तावेजों के आधार पर चार विभागों में एक-एक सीट बढ़ाने की अनुमति दी है। यह अनुमति शुरुआती तौर पर एक वर्ष के लिए है।” — डॉ. अलका गुप्ता, प्राचार्य

अनुमति की अवधि और नवीनीकरण की शर्त

महाविद्यालय प्रशासन के मुताबिक सीट वृद्धि की मंजूरी फिलहाल एक वर्ष के लिए प्रभावी रहेगी। इसके बाद कॉलेज द्वारा तय वार्षिक लक्ष्यों की पूर्ति, दस्तावेजी सत्यापन और नियामकीय मानकों के अनुपालन के आधार पर इसे हर वर्ष नवीनीकृत किया जाएगा। यानी सीटों की निरंतरता कॉलेज के प्रदर्शन और सत्यापन प्रक्रिया पर निर्भर रहेगी।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि डेंटिस्ट एक्ट 1948 के प्रावधानों का उल्लंघन कर किया गया कोई भी प्रवेश वैध नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि प्रवेश प्रक्रिया में स्वीकृत सीटों, मान्यता शर्तों और अधिनियम के नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

संस्थान की प्रोफाइल और मौजूदा शैक्षणिक स्थिति

प्राचार्य डॉ. अलका गुप्ता ने बताया कि शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर की स्थापना 1961 में हुई थी। यह संस्थान प्रदेश के प्रमुख डेंटल शिक्षण केंद्रों में गिना जाता है। एनआईआरएफ रैंकिंग 2023 में डेंटल श्रेणी में इसे देशभर में 32वां स्थान मिला था।

महाविद्यालय में कुल 9 विषयों में पढ़ाई होती है। इनमें ओरल सर्जरी, ऑर्थोडॉन्टिक्स और पीडोडॉन्टिक्स जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। अब चार विभागों में नई EWS सीटें जुड़ने से MDS स्तर पर विषयवार प्रवेश क्षमता में आंशिक वृद्धि होगी।

अभ्यर्थियों के लिए इसका क्या महत्व

डेंटल पीजी में सीमित सीटों के बीच श्रेणीवार अवसर बढ़ना सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चूंकि बढ़ी हुई सीटें EWS वर्ग के लिए आरक्षित हैं, इसलिए इस श्रेणी के उम्मीदवारों को प्रतिस्पर्धा के बीच अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। हालांकि अंतिम प्रवेश केवल नियमानुसार अधिसूचित सीटों और मान्यता शर्तों के अनुसार ही किया जा सकेगा।

मंत्रालय की चेतावनी के बाद कॉलेजों और अभ्यर्थियों दोनों के लिए यह जरूरी रहेगा कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान सीट मैट्रिक्स, विभागीय स्वीकृति और वैधानिक नियमों की पुष्टि कर ही आगे बढ़ा जाए। प्रशासन ने संकेत दिया है कि आगामी सत्र की प्रवेश प्रक्रिया में यह नई स्वीकृत सीटें शामिल की जाएंगी, बशर्ते सभी नियामकीय शर्तें समय पर पूरी हों।

कुल मिलाकर, 2026-27 सत्र के लिए मिली यह स्वीकृति इंदौर के इस सरकारी संस्थान में MDS पाठ्यक्रम की EWS क्षमता बढ़ाने वाला फैसला है, जिसका लाभ विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पीजी डेंटल अभ्यर्थियों को मिलेगा।