Indore News: रंगों के त्योहार होली को देखते हुए इंदौर वनमंडल ने एक बार फिर प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि इस बार उत्पादन पर मौसम का असर दिख रहा है।

लंबे समय तक ठंड रहने और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण पलाश, जिसे टेसू भी कहा जाता है, के फूल सामान्य समय से देर से खिले। इसी वजह से फूल एकत्र करने और प्रोसेसिंग का काम भी देरी से शुरू हुआ।
वन विभाग ने चोरल जंगल क्षेत्र से ग्रामीणों की मदद लेकर पलाश के फूल जुटाए हैं। फूलों को संबंधित रेंज कार्यालयों में पहुंचाकर पहले सुखाया गया। इसके बाद सूखे फूलों को पीसकर हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि होली से पहले यह प्राकृतिक रंग शहर में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।
मौसम की वजह से उत्पादन पर दबाव
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार मौसम में नमी बनी रही और ठंड का असर अपेक्षाकृत लंबा चला। इससे पलाश के फूलों की उपलब्धता प्रभावित हुई। जब फूल कम मात्रा में मिलते हैं, तो गुलाल बनाने की कुल क्षमता भी घटती है। विभाग ने माना है कि इस बार उत्पादन सामान्य वर्षों से कुछ कम रह सकता है, लेकिन तैयार माल की आपूर्ति तय समय पर शुरू करने की कोशिश जारी है।
1 मार्च से शहर में बिक्री शुरू
वन विभाग के मुताबिक तैयार हर्बल गुलाल 1 मार्च से आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी बिक्री शहर के विभिन्न वन विभाग केंद्रों और अन्य तय काउंटरों से होगी। विभाग ने बताया कि यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है और पलाश के नारंगी फूलों से तैयार किया जाता है।

इंदौर में हर साल होली के दौरान प्राकृतिक रंगों की मांग बढ़ती है। इसी जरूरत को देखते हुए वन विभाग स्थानीय स्तर पर फूल संग्रह, सुखाने और पीसने की प्रक्रिया के जरिए तैयार उत्पाद बाजार तक पहुंचाता है। इस प्रक्रिया में ग्रामीणों की भागीदारी भी रहती है, जिससे फूल संग्रह का काम तेजी से हो पाता है।
रासायनिक रंगों के विकल्प पर विभाग का फोकस
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को रासायनिक रंगों की जगह सुरक्षित विकल्प देना है। पलाश आधारित गुलाल को त्वचा के लिहाज से बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। इस बार उत्पादन पर असर के बावजूद आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने के लिए विभाग रेंज स्तर पर तैयारियों की निगरानी कर रहा है।
