होली 2026 की तिथियों को लेकर इस बार लोगों में अलग-अलग स्तर पर संशय बना रहा। मुख्य वजह 2 मार्च को भद्रा काल और 3 मार्च को पड़ रहे चंद्र ग्रहण को माना जा रहा है। इसी कारण होलिका दहन, धुरैड़ी और होली की भाई दूज की सही तारीख को लेकर सवाल बढ़े। ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री ने इन तिथियों और मुहूर्त को लेकर स्पष्ट जानकारी दी है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन के दिन भद्रा का प्रभाव रहेगा। ऐसे में सामान्य समय के बजाय भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन का विधान बताया गया है। शास्त्री के मुताबिक यह समय रात 1 बजे से 2 बजे के बीच माना गया है।
“2 मार्च को भद्रा होने से होलिका दहन भद्रा के पुच्छ काल, रात 1 से 2 बजे के बीच करना उचित है। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के दौरान दहन वर्जित रहेगा, इसलिए धुरैड़ी 4 मार्च को मनाई जाएगी।” — ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री
3 मार्च को ग्रहण, इसलिए रंगोत्सव 4 मार्च
शास्त्री के अनुसार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने से उस दिन धुरैड़ी यानी रंगों वाली होली मनाने को लेकर परंपरागत वर्जना लागू मानी जाती है। यही कारण है कि रंगोत्सव को अगले दिन, 4 मार्च को रखा गया है। इस तरह 2 मार्च रात को होलिका दहन, 3 मार्च ग्रहण प्रभाव और 4 मार्च धुरैड़ी का क्रम बनता है।
बीते दिनों भी भद्रा और ग्रहण के कारण तिथि को लेकर असमंजस की चर्चा रही थी। इस बार भी वही स्थिति दोबारा बनी, लेकिन उपलब्ध गणनाओं के आधार पर अब क्रम स्पष्ट बताया जा रहा है।
होली की भाई दूज कब मनाई जाएगी
ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार होली के बाद भाई दूज द्वितीया तिथि में मनाई जाती है। चूंकि 4 मार्च को धुरैड़ी रहेगी और द्वितीया तिथि 4 मार्च शाम 4:48 बजे के बाद शुरू होगी, इसलिए 5 मार्च को द्वितीया में सूर्योदय मिलने पर भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।
दी गई तिथि गणना के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा 4 मार्च को शाम 4:48 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया लगेगी। चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया 5 मार्च को शाम 5:03 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में भाई दूज का तिलक किया जाएगा।
पूजन का समय और तिलक नियम
शास्त्री ने बताया कि भाई दूज का पूजन दोपहर काल में करना मान्य माना जाता है। इसलिए 5 मार्च को दोपहर 12 बजे के बाद पूजन कर भाई को तिलक किया जा सकता है। परिवारों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजन सामग्री और विधि में अंतर हो सकता है, लेकिन तिथि का आधार द्वितीया और दोपहर का पूजन ही रहेगा।
कुल मिलाकर 2026 के लिए यह क्रम सामने आया है: 2 मार्च की रात भद्रा पुच्छ में होलिका दहन, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण धुरैड़ी स्थगित, 4 मार्च को रंगोत्सव और 5 मार्च को होली भाई दूज। जिन लोगों को तिथियों में भ्रम था, उनके लिए यही क्रम मार्गदर्शक माना जा रहा है।