मध्यप्रदेश में मौसम का रुख तेजी से बदला है और फरवरी के अंतिम दिनों में ही गर्मी का असर स्पष्ट दिखने लगा है। राज्य के कई शहरों में अधिकतम तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। दिन का तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री ऊपर चल रहा है, जिसके कारण दोपहर में धूप तेज महसूस हो रही है।
मौसम आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटे में प्रदेश के किसी हिस्से में बारिश दर्ज नहीं हुई। सुबह के समय आर्द्रता अपेक्षाकृत अधिक रही, लेकिन शाम तक नमी में कमी दर्ज की गई। दृश्यता सामान्य बनी रही। यानी मौजूदा स्थिति में गर्म और शुष्क दोपहर का ट्रेंड मजबूत हो रहा है।
पश्चिमी मध्यप्रदेश में गर्मी का ज्यादा असर
राज्य में सबसे अधिक तापमान खंडवा में 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद नर्मदापुरम में 34.3 डिग्री और गुना में 33.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। राजधानी भोपाल में भी अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस समय के औसत के मुकाबले ऊंचा माना जा रहा है।
तापमान के इन आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि पश्चिमी हिस्से में गर्मी की तीव्रता जल्दी बढ़ रही है। दोपहर के समय खुले इलाकों में गर्म हवा और तेज धूप का असर ज्यादा महसूस हो रहा है।
पूर्वी जिलों में भी तापमान 32 से 34 डिग्री के बीच
पूर्वी मध्यप्रदेश में भी स्थिति अलग नहीं रही। जबलपुर, दमोह, सागर, रीवा और सतना सहित अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। इससे साफ है कि तापमान वृद्धि पूरे प्रदेश में व्यापक रूप से दिखाई दे रही है, न कि केवल कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित है।
हालांकि रात के तापमान में अभी कुछ राहत बनी हुई है। प्रदेश का सबसे कम न्यूनतम तापमान पचमढ़ी में 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में सुबह और देर शाम हल्की ठंडक अभी मौजूद है, लेकिन मैदानी हिस्सों में दिन-रात का अंतर धीरे-धीरे कम हो सकता है।
मार्च से मई के लिए मौसम विभाग का आउटलुक
मौसम विभाग ने मार्च से मई की अवधि के लिए हॉट वेदर सीजन आउटलुक जारी किया है। इसके मुताबिक देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। मध्य भारत के कई क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा गर्म दिन पड़ सकते हैं, जिनमें मध्यप्रदेश के हिस्से भी शामिल हैं।
आउटलुक में यह भी संकेत है कि न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर रह सकता है। इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में रातें भी क्रमश: गर्म होने लगेंगी। मार्च से मई के दौरान कुछ क्षेत्रों में हीटवेव यानी लू की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।
विभागीय संकेतों के अनुसार मार्च 2026 के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य या सामान्य से अधिक रह सकता है। वहीं, कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश की संभावना बताई गई है, जबकि उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में कम वर्षा की स्थिति बन सकती है।
मौजूदा ट्रेंड क्या बता रहा है
फरवरी के आखिरी सप्ताह में तापमान का 35 डिग्री के करीब पहुंचना मौसमी बदलाव की तेज गति को दिखाता है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो अप्रैल और मई में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रदेश में ठंड का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है और अब गर्मी का चरण शुरू माना जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को दोपहर की तेज धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और अनावश्यक रूप से लंबे समय तक खुले में न रहने की सलाह दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश के लिए मार्च की शुरुआत गर्म रहने के संकेत दे रही है। आने वाले तीन महीनों में तापमान, हीट स्ट्रेस और लू के जोखिम पर लगातार निगरानी की जरूरत होगी, खासकर उन जिलों में जहां दिन का पारा पहले ही सामान्य से ऊपर चल रहा है।