भस्म आरती में पहुंचे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, बोले- अहंकार और इर्ष्या का त्याग यहां स्वाभाविक है

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन देखने को मिला। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल के दरबार में पहुंचकर आरती में सहभागिता की। मंदिर परिसर में उनकी मौजूदगी के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाएं नियमित प्रोटोकॉल के तहत संचालित रहीं।

मंदिर सूत्रों के अनुसार धनखड़ करीब दो घंटे तक नंदी हाल में बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने भस्म आरती के दर्शन किए और भगवान शिव की आराधना की। आरती के बाद उन्होंने देहरी से महाकाल का पूजन किया और जल अर्पित किया। उन्होंने देश की सुख-समृद्धि की कामना भी की।

आरती के बाद मंदिर प्रबंधन ने किया स्वागत

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने पूर्व उपराष्ट्रपति का स्वागत किया। सम्मान स्वरूप उन्हें बाबा महाकाल का आशीर्वाद, प्रसाद और स्मृति चिह्न भेंट किया गया। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने दर्शन और पूजन की पूरी प्रक्रिया मंदिर परंपरा के अनुसार संपन्न कराई।

धनखड़ ने बातचीत में धार्मिक स्थलों पर हो रहे प्रबंधन सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है और तीर्थस्थलों पर व्यवस्थाओं में सुधार से श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है।

“देश में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। हमारे धार्मिक स्थलों पर जिस प्रकार का बेहतर प्रबंधन और विकास कार्य हो रहे हैं, वे प्रशंसनीय हैं।” — जगदीप धनखड़

धार्मिक अनुभव पर दिया बयान

पूर्व उपराष्ट्रपति ने महाकाल मंदिर में आध्यात्मिक अनुभव पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे धाम में आने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक भावनाओं से दूरी बनती है।

“यहां आकर शांति मिलती है। उससे अहंकार, ईर्ष्या-प्रतिशोध जैसी नकारात्मक भावनाएं समाप्त हो जाती हैं।” — जगदीप धनखड़

उज्जैन का महाकाल मंदिर लंबे समय से देशभर के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बना हुआ है। भस्म आरती के लिए रोजाना बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। मंदिर में नियमित तौर पर वीआईपी, वीवीआईपी, जनप्रतिनिधि, कला और खेल जगत से जुड़े लोग भी दर्शन के लिए आते रहे हैं।

महाकाल धाम में बढ़ती आवाजाही और व्यवस्था

मंदिर प्रशासन के अनुसार तीर्थ क्षेत्र में बढ़ती आवाजाही को देखते हुए व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया गया है। दर्शन मार्ग, प्रवेश प्रबंधन और पूजन संबंधी प्रक्रियाओं में सुधार के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ी है। शनिवार तड़के हुए इस कार्यक्रम में भी तय व्यवस्था के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

महाकाल मंदिर में पूर्व उपराष्ट्रपति की यह यात्रा धार्मिक और प्रशासनिक, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर उन्होंने भस्म आरती में सहभागी बनकर पारंपरिक अनुष्ठान में उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्थलों के प्रबंधन पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण भी रखा।