Indore News: इंदौर स्वच्छता के लिए देशभर में पहचाना जाता है। अब स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यहां के लोगों को जागरुक होने की आवश्यकता है। जीवनशैली में बदलाव, बढ़ता तनाव, प्रदूषण और असंतुलित खानपान आदि सभी कारणों ने शहर के लोगों की सेहत को प्रभावित किया है।
कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, इंदौर द्वारा किए गए एक विस्तृत स्वास्थ्य अध्ययन ने शहर की स्वास्थ्य स्थिति का एक गंभीर लेकिन जागरूक करने वाला चित्र प्रस्तुत किया है।
लैबोरेटरी मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ. गौरव शेलगांवकर और हिस्टोपैथोलॉजी की कंसल्टेंट डॉ. शिल्पी दोसी द्वारा कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, इंदौर में मरीजों की जांच में कुछ विशेष स्वास्थ्य रुझान निकलकर सामने आए हैं, जिनमें सामान्य स्वास्थ्य से लेकर कैंसर संबंधित अलर्ट भी शामिल हैं, जो इंदौर के लोगों को जागरूक कर सकते हैं।
एनीमिया, डायबिटीज, किडनी और थायराइड विकार व विटामिन्स की कमी पर अध्ययन
लैबोरेटरी मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ. गौरव शेलगांवकर ने एनीमिया, प्री-डायबिटीज और डायबिटीज, किडनी और थायराइड विकार, विटामिन्स की कमी को लेकर किए गए वार्षिक अध्ययन में 3454 महिलाएं और 5964 पुरुषों को शामिल किया। जिन्हें 45 वर्ष से कम और 45 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग में बांटा गया।
एनीमिया का महिलाओं में अधिक असर
अध्ययन के अनुसार हल्के से मध्यम एनीमिया के मामले महिलाओं (10%) में पुरुषों (1.9%) की तुलना में कहीं अधिक पाए गए। गंभीर एनीमिया के मामले भले ही कम रहे, लेकिन इनमें भी महिलाओं की संख्या पुरुषों से दोगुनी रही। यह आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं में पोषण संबंधी कमी आज भी एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर कम उम्र वर्ग में।
प्री-डायबिटीज और डायबिटीज का बढ़ता खतरा
फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c के आधार पर 30.9% पुरुष और 29% महिलाएं प्री-डायबिटीज से प्रभावित पाए गए। वहीं डायबिटीज के मामले 16.2% पुरुषों और 12.2% महिलाओं में दर्ज हुए। खास बात यह है कि 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में यह समस्या अधिक गंभीर रूप से देखी गई। यह संकेत देता है कि समय रहते जीवनशैली में सुधार न किया जाए तो स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।
किडनी और थायराइड विकार
किडनी की कार्यक्षमता दर्शाने वाले क्रिएटिनिन का स्तर महिलाओं (0.80%) की तुलना में पुरुषों (1.90%) में अधिक पाया गया। साथ ही, अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या ज़्यादा देखी गई, जो किडनी की कार्यक्षमता पर असर का संकेत है। थायराइड विकारों में हाइपोथायरायडिज्म 12.5% महिलाओं और 6.9% पुरुषों में पाया गया। वहीं हाइपरथायरायडिज्म के मामले अपेक्षाकृत कम रहे। विशेषकर अधिक उम्र की महिलाओं में थायराइड संबंधी समस्याएं अधिक देखी गईं।
विटामिन्स की कमी
विटामिन डी की कमी 36.3% पुरुषों और 37.3% महिलाओं में पाई गई, जो कि सबसे अधिक उम्रदराज लोगों में देखी गई। विटामिन बी12 की कमी भी 13.6% पुरुषों और 9.3% महिलाओं में पाई गई। ये आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में पोषण असंतुलन एक बड़ी समस्या बन चुका है।
कैंसर के लिए बायोप्सी के आंकड़ों से मिली अहम जानकारियां
हिस्टोपैथोलॉजी की कंसल्टेंट डॉ. शिल्पी दोसी द्वारा तीन वर्ष का अध्ययन किया गया, जिसमें 1445 बायोप्सी सैंपल की जांच की गई, जिनमें से 515 मामले (35.6%) मैलिग्नेंट यानी कैंसर पाए गए।
सबसे अधिक प्रभावित अंग:
• स्तन (Breast): 126 में से 95 केस (75%)
• हेड एंड नेक (Head & Neck): 346 में से 198 केस (57%)
• फेफड़े (Lung): 286 में से 84 केस (30%)• प्रोस्टेट (Prostate): 207 में से 52 केस (25%)
ये आंकड़े बताते हैं कि इंदौर में स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम बन चुका है। बदलती जीवनशैली, देर से विवाह और मातृत्व, कम स्तनपान, तनाव और हार्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
पुरुषों में हेड एंड नेक कैंसर का बढ़ना तंबाकू, गुटखा, धूम्रपान और शराब के सेवन से जुड़ा पाया गया। वहीं लंग कैंसर अब केवल धूम्रपान तक सीमित नहीं रहा। एडेनोकार्सिनोमा कैंसर के बढ़ते मामले यह संकेत देते हैं कि वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय कारक भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
फ्रोजन सेक्शन एनालिसिस से बढ़ी उम्मीद
कैंसर सर्जरी में फ्रोजन सेक्शन एनालिसिस तकनीक ने इलाज को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया है। हॉस्पिटल में अब तक 610 फ्रोजन सेक्शन किए जा चुके हैं, जिनमें 465 हेड एंड नेक, 73 ब्रेस्ट कंजर्विंग, 57 न्यूरो/ब्रेन और शेष गायनेकोलॉजी व आंतों की सर्जरी से जुड़े मामले थे। 95.5% सटीकता के साथ यह तकनीक ऑपरेशन के दौरान ही कैंसर की पुष्टि, मार्जिन की जांच और फैलाव का आकलन करती है, जिससे दोबारा सर्जरी की आवश्यकता कम होती है।
इंदौर का स्वास्थ्य परिदृश्य एक गंभीर चर्चा का विषय है। हालांकि आधुनिक तकनीक और समय पर जांच ने नई उम्मीद की राह दिखाई है। अब जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की समय है ताकि इंदौर सिर्फ स्वच्छ होने के साथ ही स्वस्थ शहर भी बन सके।