इंदौर ड्रेनेज मौत का मामला: कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने ₹1 करोड़ बीमा, PPE अनिवार्य करने की मांग उठाई

इंदौर में ड्रेनेज चैंबर में उतरने के दौरान दो व्यक्तियों की मौत के बाद सुरक्षा मानकों पर सवाल तेज हुए हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव राकेश सिंह यादव ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल और न्यायालयीय निर्देशों के पालन से जुड़ा बड़ा प्रशासनिक प्रश्न है।
यादव ने कहा कि देश में स्वच्छता के क्षेत्र में शीर्ष पहचान रखने वाले इंदौर में यदि सिस्टम चलाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही, तो यह चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने साफ कहा कि शहर की छवि, रैंकिंग और पुरस्कार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन लोगों की सुरक्षा उससे पहले आती है जो हर दिन जोखिम में काम करते हैं।
पूर्व महासचिव ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी सफाई कर्मचारी या श्रमिक को पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना सीवर, ड्रेनेज या सेप्टिक टैंक में नहीं उतारा जा सकता। उन्होंने कहा कि इंदौर की यह घटना दिखाती है कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन अपेक्षित सख्ती से नहीं हो रहा।
यादव के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय ने सीवर और ड्रेनेज में होने वाली मौतों को सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता माना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों में लगे कर्मचारी शहर को साफ और व्यवस्थित रखने के लिए प्रतिदिन जीवन जोखिम में डालते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था अभी भी पर्याप्त नहीं दिखती।
जोखिमपूर्ण श्रेणी में शामिल करने की मांग
राकेश सिंह यादव ने राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन से मांग की कि ड्रेनेज, सीवर, जल प्रदाय, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, विद्युत रखरखाव, गैस लाइन, निर्माण और अन्य खतरनाक कार्यों में लगे कर्मचारियों को औपचारिक रूप से हाई रिस्क कैटेगरी में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि जब काम की प्रकृति उच्च जोखिम वाली है, तो सामाजिक सुरक्षा ढांचा भी उसी स्तर का होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस श्रेणी के कर्मचारियों के लिए विशेष सुरक्षा नीति बने, जिसमें बीमा, सुरक्षा प्रशिक्षण, उपकरण उपलब्धता और निगरानी तंत्र को एक साथ जोड़ा जाए। उनके अनुसार अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारी बंटी रहने से जवाबदेही कमजोर पड़ती है, इसलिए एक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली जरूरी है।
₹1 करोड़ नॉन-प्रॉफिट समूह बीमा का प्रस्ताव
यादव ने मांग रखी कि इंदौर नगर निगम और मध्यप्रदेश शासन ड्रेनेज, सीवर और अन्य खतरनाक कार्यों में लगे सभी कर्मचारियों व श्रमिकों के लिए नॉन-प्रॉफिट समूह बीमा योजना लागू करें। इस योजना के तहत न्यूनतम ₹1 करोड़ प्रति व्यक्ति बीमा कवर अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि इस स्तर का कवर ही जोखिम की वास्तविक प्रकृति के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा दे सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीमा योजना का पूरा प्रीमियम नगर निगम या राज्य सरकार वहन करे। उनके अनुसार यदि प्रीमियम का बोझ कर्मचारियों या उनके परिवारों पर छोड़ा गया, तो योजना का उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा। परिवारों को स्थिर आर्थिक सुरक्षा तभी मिलेगी, जब कवरेज स्वतः, निरंतर और संस्थागत रूप से लागू हो।
PPE के बिना सीवर या ड्रेनेज में प्रवेश पर रोक
पूर्व महासचिव ने मांग की कि किसी भी कर्मचारी या श्रमिक को बिना पूर्ण सुरक्षा उपकरण के ड्रेनेज या सीवर में उतारने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने जिन अनिवार्य उपकरणों का उल्लेख किया, उनमें PPE किट, गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क, सेफ्टी सूट, हेलमेट, दस्ताने, सुरक्षा बेल्ट और हार्नेस शामिल हैं।
उनका कहना है कि सुरक्षा उपकरणों की सूची बनाना पर्याप्त नहीं है, इनके उपयोग की बाध्यकारी व्यवस्था भी होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि कई बार उपकरण उपलब्ध होने के दावों और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर रहता है, इसलिए निगरानी और अनुपालन की व्यवस्था समान रूप से जरूरी है।
जवाबदेही तय करने और स्वतंत्र जांच की मांग
यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए नगर निगम स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। यदि बिना सुरक्षा प्रोटोकॉल कर्मचारियों को खतरनाक स्थानों पर भेजा जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान लागू होना चाहिए। उनके अनुसार नियम तभी प्रभावी होते हैं, जब उल्लंघन पर ठोस कार्रवाई निश्चित हो।
उन्होंने इंदौर की घटना की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है। साथ ही कहा कि दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई हो, मृतकों के परिजनों को न्यायसंगत मुआवजा मिले और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देकर पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इसे केवल राहत नहीं, बल्कि संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा बताया।
यादव ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों को अनिवार्य नहीं किया गया, तो इस तरह की घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं। उन्होंने राज्य शासन और नगर निगम प्रशासन से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए और जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले हर कर्मचारी को सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण दिया जाए।
“स्वच्छ शहर का वास्तविक सम्मान तब ही संभव है, जब स्वच्छता कर्मियों का जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक हो।” — राकेश सिंह यादव