3 मार्च 2026, मंगलवार को लगने वाले चंद्रग्रहण को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय तैयारियां शुरू हो गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सूतक काल सुबह 9:14 बजे से मान्य है। ग्रहण का स्पर्श शाम 6:14 बजे और मोक्ष रात 7:02 बजे बताया गया है। सिंह राशि से जुड़े इस ग्रहण के दौरान पूजा और भोजन जैसे कार्यों पर परंपरागत रूप से रोक मानी जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार ग्रहण की समय-रेखा स्पष्ट है और सूतक से लेकर मोक्ष तक धार्मिक अनुशासन का पालन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार ग्रहण काल को सामान्य दिनचर्या से अलग माना जाता है, इसलिए घरों में पहले से तैयारी की जाती है ताकि ग्रहण समाप्त होते ही शुद्धि और पूजा का क्रम शुरू किया जा सके।
“3 मार्च को चंद्रग्रहण में सुबह 9:14 बजे सूतक, शाम 6:14 बजे स्पर्श और रात 7:02 बजे मोक्ष रहेगा।” — ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री
ग्रहण का समय और खगोलीय स्थिति
उपलब्ध विवरण में इसे खंड चंद्रग्रहण कहा गया है। साथ ही परिमाण 1.155 दर्ज है, जिसे गहरे पूर्ण ग्रहण के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। इस कारण कई जगह इसे आंशिक और पूर्ण चरणों की व्याख्या के साथ समझाया जा रहा है। सामान्य रूप से पूर्ण चंद्रग्रहण तब माना जाता है जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाए, जबकि आंशिक चंद्रग्रहण में केवल एक हिस्सा छाया से ढकता है।
चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा की रात को होता है। इस समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आते हैं। पृथ्वी के कारण चंद्रमा पर दो प्रकार की छाया पड़ सकती है, जिनमें गहरी छाया को उम्ब्रा और हल्की छाया को पेनुम्ब्रा कहा जाता है। चंद्रमा जब उम्ब्रा में प्रवेश करता है, तब ग्रहण स्पष्ट दिखता है और कुछ स्थितियों में चंद्रमा का रंग गहरा या लालिमा लिए दिखाई दे सकता है।
भारत और दुनिया में कहां दिखेगा ग्रहण
उपलब्ध खगोलीय जानकारी के अनुसार यह घटना भारत, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में देखी जा सकेगी। भारत में अधिकांश स्थानों पर चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम हिस्सा दिखाई देने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार के कुछ हिस्सों में पूर्ण चरण के अंत का दृश्य भी मिल सकता है।
इस दृश्यता पैटर्न का अर्थ यह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में ग्रहण का अनुभव एक जैसा नहीं रहेगा। कुछ शहरों में लोग ग्रहण के समापन चरण देख पाएंगे, जबकि पूर्वोत्तर के चुनिंदा इलाकों में अपेक्षाकृत अधिक चरण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए स्थानीय चंद्रोदय समय और मौसम की स्थिति के आधार पर दृश्यता बदल सकती है।
सूतक के दौरान क्या माना जाता है
धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार सूतक से मोक्ष तक का समय संयम का काल माना जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, भोजन पकाना और भोजन करना जैसे कार्य कई परिवारों में टाले जाते हैं। परंपरागत घरों में ग्रहण से पहले ही आवश्यक भोजन और दिनचर्या का प्रबंध कर लिया जाता है।
इसी तरह मंदिरों में भी ग्रहण अवधि के दौरान नियमित पूजा क्रम सीमित रखा जाता है और मोक्ष के बाद शुद्धि के साथ पूजा दोबारा शुरू की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इन मान्यताओं के पालन का तरीका थोड़ा बदल सकता है, लेकिन सूतक और ग्रहणोत्तर शुद्धि का मूल क्रम लगभग समान रहता है।
ग्रहण मोक्ष के बाद सबसे पहले क्या करें
धार्मिक परंपरा के अनुसार मोक्ष के बाद सबसे पहले घर के अंदर की सफाई शुरू की जाती है। इसके बाद बाहरी हिस्से की सफाई की जाती है। सफाई पूरी होने पर स्नान किया जाता है और फिर भगवान की पूजा की जाती है। मंदिर या पूजा स्थल की धुलाई और व्यवस्था भी इसी क्रम में की जाती है।
ग्रहण के दौरान रखा भोजन अलग करने की सलाह दी जाती है। इसके बाद नया और स्वच्छ भोजन तैयार कर भगवान को भोग लगाने की परंपरा बताई गई है। कई परिवार इस चरण के बाद ही सामान्य भोजन ग्रहण करते हैं। यह क्रम धार्मिक शुद्धि और दिनचर्या की पुनः शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
पिछले चंद्रग्रहणों के दौरान भी कई स्थानों पर इसी तरह ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान, सफाई और ताजा भोजन बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। इस बार भी 3 मार्च की तिथि को लेकर धार्मिक संगठनों, ज्योतिषाचार्यों और आम लोगों में समय-सारणी के आधार पर तैयारी देखी जा रही है।