3 मार्च 2026, मंगलवार को लगने वाला चंद्र ग्रहण आस्था और खगोल, दोनों दृष्टियों से चर्चा में है। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक यह ग्रहण सिंह राशि में घटित हो रहा है। इस ग्रहण से जुड़ा सूतक काल सुबह 9:14 बजे से प्रभावी माना गया है। ग्रहण का स्पर्श समय शाम 6:14 बजे और मोक्ष रात 7:02 बजे बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को संयम का समय माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक नजरिए से यह पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति का परिणाम है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। इसी वजह से श्रद्धालु इस दौरान दैनिक गतिविधियों में सावधानी रखते हैं। कई परिवार सूतक से ही पूजा-पाठ से विराम लेते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद ही नियमित अनुष्ठान दोबारा शुरू करते हैं। इसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है।
सूतक काल में किन कार्यों से परहेज किया जाता है
सूतक लगने के बाद पूजा-पाठ, हवन और मूर्ति स्पर्श को वर्जित माना जाता है। इसी तरह भोजन पकाने और भोजन करने से भी परहेज की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है। मांगलिक कार्य, जैसे गृह प्रवेश, सगाई, विवाह या नई वस्तु खरीदने को भी इस समय टाला जाता है। परंपरागत मान्यता यह भी है कि ग्रहण के दौरान बना भोजन प्रभावित हो सकता है, इसलिए पहले से बने खाद्य पदार्थों में तुलसी पत्र डालने की प्रथा अपनाई जाती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी की सलाह दी जाती है। मान्यताओं के अनुसार उन्हें ग्रहण के दौरान घर के भीतर रहने और नुकीली वस्तुओं के उपयोग से बचने को कहा जाता है। यह सलाह धार्मिक आस्थाओं पर आधारित है और परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही है।
चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक कारण क्या है
विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तब बनता है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और ग्रहण दिखाई देता है। यह घटना केवल पूर्णिमा की रात को संभव होती है। पृथ्वी की छाया के गहरे हिस्से को उम्ब्रा और हल्के हिस्से को पेनुम्ब्रा कहा जाता है।
जब चंद्रमा पूरी तरह उम्ब्रा में चला जाता है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। वहीं चंद्रमा का कुछ हिस्सा उम्ब्रा में आने पर खंड ग्रहण दिखाई देता है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा कई बार तांबे या लालिमा लिए रंग में नजर आता है। आम बोलचाल में इसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
राशियों पर असर को लेकर क्या कहा गया है
ज्योतिषीय आकलन में इस ग्रहण का असर सभी राशियों पर अलग-अलग बताया गया है। मेष, वृष, कर्क, कन्या, धनु, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए समय अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना गया है। इन राशियों के लोगों को संयम, निर्णय में सावधानी और दिनचर्या में संतुलन रखने की सलाह दी गई है।
मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए ग्रहण को अपेक्षाकृत सकारात्मक माना गया है। हालांकि ज्योतिषाचार्य यह भी मानते हैं कि अंतिम फल व्यक्तिगत कुंडली की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए सामान्य राशिफल को संकेतक मानकर ही देखना उचित माना जाता है।
मोक्ष के बाद कौन से नियम अपनाए जाते हैं
ग्रहण समाप्ति के बाद, यानी मोक्ष के पश्चात, सबसे पहले घर की सफाई करने की परंपरा है। इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर के मंदिर या पूजा स्थल की सफाई भी इसी क्रम में की जाती है। ग्रहण अवधि में रखा भोजन त्यागकर ताजा भोजन बनाने और भगवान को भोग लगाने की मान्यता प्रचलित है।
कई लोग मोक्ष के बाद दान-पुण्य, मंत्र जाप और ध्यान भी करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार ग्रहण के बाद किया गया स्नान, ध्यान और दान विशेष फलदायी माना जाता है। इस तरह 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होने के साथ आस्था, अनुशासन और परंपरा से जुड़ा अवसर भी माना जा रहा है।