एमपी के प्राइवेट स्कूलों में बढ़ा खर्च, पांचवीं तक एनसीईआरटी हटाई, नर्सरी से ही थमाई जा रहीं ढेरों किताबें

राजधानी के निजी स्कूलों में छोटे बच्चों की पढ़ाई एक बार फिर महंगी होती नजर आ रही है। प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब महंगी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबों से पढ़ाई कराई जाएगी। स्कूलों द्वारा जारी सिलेबस सूची से खुलासा हुआ है कि कक्षा पांच तक के पाठ्यक्रम से National Council of Educational Research and Training (NCERT) की किताबों को बाहर कर दिया गया है। शिक्षा विभाग की निगरानी के बावजूद स्कूलों ने एनसीईआरटी से जुड़ी गाइडलाइन की अनदेखी की है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।

शहर के करीब चालीस हजार निजी स्कूलों में नर्सरी से लेकर प्राथमिक कक्षाओं तक एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एक अप्रैल से नए सत्र की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। इसी बीच स्कूलों ने ऑनलाइन माध्यम से किताबों और यूनिफॉर्म की सूची जारी कर दी है। छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए आठ से दस तक किताबें निर्धारित की गई हैं, जबकि कॉपियों की संख्या अलग से बताई जाती है। खास बात यह है कि कक्षा छठी से ही विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई जाएगी। छठवीं में कुल 19 किताबें निर्धारित हैं, जिनमें से केवल छह किताबें एनसीईआरटी की शामिल की गई हैं।

जारी सिलेबस के अनुसार नर्सरी कक्षा में नौ किताबें रखी गई हैं, जिनकी कीमत डेढ़ सौ से लेकर ढाई सौ रुपए तक है। कक्षा दो में ग्यारह किताबें निर्धारित की गई हैं, जिनमें कुछ किताबें 40 रुपए से शुरू होकर 625 रुपए तक की हैं। कक्षा पांच में चौदह किताबें शामिल हैं, जिनकी कीमत 40 रुपए से लेकर 609 रुपए तक बताई गई है। कक्षा छठवीं में उन्नीस किताबों का सेट है, जिनकी कीमत 65 रुपए से 499 रुपए तक है। इन आंकड़ों से साफ है कि एक ही कक्षा की किताबों पर हजारों रुपए का खर्च आ सकता है।

राजधानी में लगभग 150 स्कूल Central Board of Secondary Education (CBSE) से संबद्ध हैं। महंगी किताबों को लेकर सबसे अधिक शिकायतें इन्हीं स्कूलों से सामने आई हैं। अभिभावकों का कहना है कि एनसीईआरटी की सस्ती और मानक किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें अनिवार्य कर दी गई हैं, जिन्हें अक्सर स्कूल परिसर या तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव रहता है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच के लिए एक टीम गठित की है। जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूलों से प्रत्येक कक्षा की किताबों की सूची मांगी गई है और उसका सिलेबस से मिलान किया जा रहा है। यदि किसी स्कूल द्वारा निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नए सत्र की शुरुआत से पहले अभिभावक उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन सख्त कदम उठाए, ताकि छोटे बच्चों की पढ़ाई अनावश्यक रूप से महंगी न हो और शिक्षा का अधिकार सभी के लिए समान रूप से सुलभ बना रहे।