एमपी आबकारी से खजाना भरेगा, सिर्फ भोपाल से 1432 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान

मध्यप्रदेश में शराब बिक्री राज्य सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत बन चुकी है। हर साल आबकारी से होने वाली आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की है। इस नई नीति का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि शराब कारोबार में पारदर्शिता लाना और लंबे समय से जमे बड़े कारोबारियों के एकाधिकार को खत्म करना भी है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से छोटे और नए उद्यमियों को भी व्यवसाय में अवसर मिलेगा।

नई नीति के तहत शराब दुकानों का आवंटन ई-टेंडर प्रक्रिया से किया जा रहा है। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकार को अधिक बोली मिलने की संभावना रहेगी। केवल भोपाल जिले में ही शराब दुकानों के लिए इस बार 1432 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य तय किया गया है, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है। हालांकि 2 मार्च को हुई पहली नीलामी में एक भी टेंडर प्राप्त नहीं हुआ, फिर भी विभाग के अधिकारी इसे शुरुआती तकनीकी स्थिति मान रहे हैं और दोबारा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी तक के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में शराब से मिलने वाला राजस्व लगातार बढ़ रहा है। राजधानी भोपाल में चार प्रमुख समूहों के माध्यम से पिछले दौर में अच्छा लाभ हुआ था। आंकड़ों के अनुसार, प्रत्येक समूह को लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा हुआ। इससे यह स्पष्ट है कि शराब कारोबार अब भी लाभकारी बना हुआ है और सरकार के लिए आय का स्थायी स्रोत है।

यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की बात करें तो राजधानी भोपाल में शराब दुकानों के ठेके 1193 करोड़ रुपये में हुए थे। यह राशि निर्धारित लक्ष्य से लगभग 11 प्रतिशत अधिक थी। विभाग को करीब 120 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिला था, जो अपेक्षा से ज्यादा था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सरकार ने लक्ष्य में और बढ़ोतरी की है।

वर्तमान वर्ष में राजधानी की शराब दुकानों के आरक्षित मूल्य में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले जहां कुल मूल्य 1193 करोड़ रुपये था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 1432 करोड़ रुपये कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि नई व्यवस्था से करीब 240 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उनका यह भी कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और प्रतिस्पर्धी बोली लगने पर यह राशि और बढ़ सकती है।

इस बार संरचना में भी बड़ा बदलाव किया गया है। भोपाल में कुल 87 कम्पोजिट शराब दुकानों की नीलामी की जा रही है। पहले इन्हें चार बड़े समूहों में बांटा गया था, लेकिन इस बार दुकानों को 20 छोटे-छोटे समूहों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों को अवसर देना और बड़े खिलाड़ियों की पकड़ को कम करना है। 2 मार्च को सात समूहों के 29 ठेकों के लिए पहली नीलामी आयोजित की गई थी, लेकिन कोई भी बोली नहीं आई। अब विभाग नई तारीख घोषित कर फिर से ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा।

सरकार को उम्मीद है कि नई आबकारी नीति और समूहों के पुनर्गठन से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय इजाफा होगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आने वाले दौर में छोटे कारोबारी किस हद तक इस व्यवस्था का लाभ उठा पाते हैं और क्या वाकई बड़े व्यापारिक घरानों का वर्चस्व कम हो पाता है।