भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 मौतों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, CBI जांच की मांग पर 16 मार्च को होगी अहम सुनवाई

भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 36 लोगों की मौत के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। इस गंभीर घटना को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इतनी बड़ी त्रासदी होने के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। याचिका में विशेष रूप से इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) से कराने की मांग उठाई गई है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।

यह याचिका वकील अनिल ओझा द्वारा अभिभाषक पुनीत शर्मा की ओर से अदालत में प्रस्तुत की गई। मामले की सुनवाई शुक्रवार को Madhya Pradesh High Court में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष हुई। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत बहस की आवश्यकता बताई और अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख निर्धारित कर दी। अब इस तारीख पर दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत तर्क रखे जाएंगे।

याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि दूषित पानी की वजह से 36 लोगों की मौत होने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासन जानबूझकर जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश कर रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि केवल कुछ अधिकारियों को उनके पद से हटाना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे मामले में लापरवाही ही नहीं बल्कि एक संभावित षड्यंत्र के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि पानी की गुणवत्ता से जुड़े टेंडर जारी होने के बाद भी संबंधित फाइलों को जानबूझकर दबा दिया गया और समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। इसी कारण दूषित पानी की आपूर्ति जारी रही और आखिरकार कई लोगों की जान चली गई। याचिका में इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की मांग की गई है।

इस मामले में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को नामजद किया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार, नगर निगम आयुक्त और Madhya Pradesh Pollution Control Board को भी याचिका में पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी इन संस्थाओं की भी बनती है, इसलिए जांच के दायरे में इन्हें भी शामिल किया जाना जरूरी है।

याचिका में अदालत के सामने एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी रखा गया है। इसमें Upahar Cinema Fire का हवाला देते हुए बताया गया कि उस घटना में लोगों की मौत के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच की गई थी। उसी तरह भागीरथपुरा की घटना में भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो सके और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।