सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट: 36 दिनों में चांदी ₹1.25 लाख सस्ती, निवेशकों में हलचल

भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी उतार-चढ़ाव के बीच कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आज, 6 मार्च 2026 को सोने और चांदी के दामों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखी गई। मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते आए इस सुधार ने आम खरीदारों को थोड़ी राहत दी है, लेकिन निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
सोने की चमक पड़ी फीकी
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार:
  • आज की गिरावट: 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,835 सस्ता होकर ₹1,58,751 पर आ गया है।
  • 3 दिन का रिकॉर्ड: पिछले तीन दिनों में सोने की कीमतों में कुल ₹8,720 की बड़ी कटौती हुई है।
  • ऑल-टाइम हाई से तुलना: जनवरी के अंत में सोना ₹1.76 लाख के अपने उच्चतम स्तर पर था, जिससे अब तक यह करीब ₹17,370 सस्ता हो चुका है।
चांदी के दामों में बड़ी गिरावट
चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख सोने से भी अधिक आक्रामक रहा है:
  • आज का भाव: एक किलो चांदी ₹3,489 गिरकर ₹2,60,723 पर पहुंच गई है।
  • ऐतिहासिक गिरावट: चांदी ने 29 जनवरी को ₹3.86 लाख का ऑल-टाइम हाई छुआ था। मात्र 36 दिनों के भीतर चांदी ₹1.25 लाख प्रति किलो तक सस्ती हो गई है।
शहरों में क्यों अलग होते हैं दाम?
अक्सर देखा जाता है कि दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में सोने के दाम अलग-अलग होते हैं। इसके मुख्य चार कारण हैं:
  1. माल ढुलाई और सुरक्षा: सोने को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने में लगने वाला ईंधन और भारी सुरक्षा खर्च स्थानीय कीमतों को बढ़ा देता है।
  2. मात्रा का प्रभाव: दक्षिण भारत में सोने की खपत सबसे अधिक है। वहां के ज्वेलर्स भारी मात्रा (बल्क) में खरीदारी करते हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली छूट का लाभ ग्राहकों को कम कीमत के रूप में मिलता है।
  3. स्थानीय एसोसिएशन: हर राज्य के ज्वेलरी संगठन (जैसे मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) स्थानीय मांग और आपूर्ति के आधार पर प्रतिदिन के रेट तय करते हैं।
  4. पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस समय और किस भाव पर खरीदा है, यह भी ग्राहकों को मिलने वाली अंतिम कीमत को प्रभावित करता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में यह कमी अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे बदलावों और घरेलू स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली के कारण है। आने वाले दिनों में कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।