मिडिल ईस्ट जंग का असर: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, भारत बोला- नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

News Delhi: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। 9 मार्च 2026 को कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।

आसमान छूती कीमतें: 10 दिन में 48% का उछाल

युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। पिछले शुक्रवार को जो ब्रेंट क्रूड 93 डॉलर पर बंद हुआ था, वह सोमवार को 25% की बढ़त के साथ 116 डॉलर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के महज 10 दिनों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 48% की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।

इस संकट का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से परिवहन ठप हो गया है, जिससे यूएई और कुवैत जैसे देशों को तेल निर्यात करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत की स्थिति: 8 हफ्ते का बैकअप और रूस से राहत

वैश्विक हाहाकार के बीच भारत सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं होगी।

  • पर्याप्त भंडार: भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का 25 करोड़ बैरल (लगभग 4,000 करोड़ लीटर) से ज्यादा का स्टॉक है।

  • सप्लाई चेन: सरकार के अनुसार, यदि वैश्विक सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाती है, तो भी भारत की जरूरतों को 7 से 8 हफ्तों तक बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सकता है।

  • रूस से मदद: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का विशेष लाइसेंस दिया है, जो 3 अप्रैल तक वैध है। इससे घरेलू बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी।

पेट्रोल-डीजल स्थिर, लेकिन रसोई गैस का झटका

सरकार ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम बढ़ने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल के दाम लगभग स्थिर रहे हैं। इसकी तुलना में पाकिस्तान में कीमतें 55% और जर्मनी में 22% तक बढ़ी हैं।

हालाकि, आम आदमी की रसोई पर महंगाई की मार पड़ी है। सरकार ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़ा दिए हैं। अब दिल्ली में 14.2 किलो का सिलेंडर 853 रुपए के बजाय 913 रुपए में मिलेगा। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी 115 रुपए का इजाफा किया गया है।

युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा रहा है, लेकिन मजबूत रणनीतिक भंडार और कूटनीतिक प्रयासों के चलते भारत फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखने में सफल दिख रहा है।