Iran-Israel war: पाकिस्तान इस समय अपने सबसे बुरे आर्थिक और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहा है। मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध के कारण उपजे तनाव और घरेलू अर्थव्यवस्था की बदहाली ने मिलकर देश को “फ्यूल इमरजेंसी” जैसी स्थिति में धकेल दिया है। शुक्रवार रात जैसे ही शहबाज शरीफ सरकार ने ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि का ऐलान किया, पूरे देश की सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई।
रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी: 55 रुपये का ‘तेल बम’
पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एकमुश्त 55 पाकिस्तानी रुपये (PKR) की वृद्धि कर दी है। यह देश के इतिहास की सबसे बड़ी वृद्धि है। इस घोषणा के बाद नई कीमतें कुछ इस प्रकार हैं:
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पेट्रोल: 321.17 PKR प्रति लीटर
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डीजल: 335.86 PKR प्रति लीटर
सरकार ने यह कदम जनता को यह भरोसा दिलाने के महज 24 घंटे बाद उठाया कि देश में तेल का पर्याप्त भंडार है। इस विरोधाभासी कदम ने जनता के बीच अविश्वास और गुस्से को हवा दे दी है।
पंपों पर ‘मारामारी’ और सप्लाई का संकट
कीमतें लागू होने से पहले कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए घंटों लाइन में लगे रहे, जिससे शहरों में भारी ट्रैफिक जाम देखा गया।
हकीकत यह है कि पाकिस्तान के पास वर्तमान में केवल 26-28 दिनों का पेट्रोल-डीजल और मात्र 10 दिनों का कच्चा तेल (क्रूड) बचा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार अब ईंधन बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ और स्कूलों में ‘ऑनलाइन क्लासेज’ जैसे कड़े विकल्प तलाश रही है।
आयात और सप्लाई चेन में बाधा
पाकिस्तान अपनी जरूरत का लगभग 80-85% तेल आयात करता है, जिसके लिए वह सऊदी अरब और यूएई पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने या प्रभावित होने से सप्लाई चेन टूट गई है।
आंकड़ों की जुबानी संकट:
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प्रतिदिन की मांग: 5,00,000 बैरल
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प्रतिदिन का आयात: 4,30,000 बैरल
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आयात बिल (2024-25 के 9 माह): 11.94 बिलियन डॉलर