मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन को जल्द ही देश के सबसे बड़े हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने उज्जैन को देश के महत्वाकांक्षी दिल्ली‑मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक नई सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत करीब 80.45 किलोमीटर लंबी आधुनिक सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिससे बाबा महाकाल की नगरी तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। नई कनेक्टिविटी से देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 3,839 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सरकार का प्रयास है कि आगामी सिंहस्थ मेला से पहले इस सड़क कनेक्टिविटी को तैयार कर लिया जाए, ताकि लाखों की संख्या में उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर यातायात सुविधा मिल सके। सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग उज्जैन पहुंचते हैं, ऐसे में हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से शहर की पहुंच क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
इस सड़क मार्ग को मई 2025 में राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिया गया था। इसके बाद परियोजना पर तेजी से काम शुरू किया गया और महज छह महीनों के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार कर ली गई। अब प्रशासन भूमि अधिग्रहण, सर्वे और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करने में जुटा हुआ है, ताकि निर्माण कार्य तय समय पर शुरू किया जा सके और परियोजना में किसी तरह की देरी न हो।
अधिकारियों के अनुसार इस सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है और संभावना जताई जा रही है कि 17 मार्च तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता सूची में रखा है और लक्ष्य है कि वर्ष 2028 से पहले इस पूरी सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि क्षेत्र को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
फिलहाल जिस मार्ग से यह नई कनेक्टिविटी बनाई जानी है, वहां कई हिस्सों में सड़क बेहद संकरी है और इसकी चौड़ाई करीब 5.5 मीटर ही है। इस कारण यहां वाहनों की रफ्तार 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास रहती है, जिससे यात्रा में काफी समय लग जाता है। लेकिन नई परियोजना के तहत बनने वाली सड़क चार लेन की होगी, जिस पर वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकेंगे। इससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी।
नई सड़क बनने के बाद खासतौर पर गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। वर्तमान में इन राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को लंबा और समय लेने वाला रास्ता तय करना पड़ता है, लेकिन एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिलने के बाद यात्रा दूरी और समय दोनों कम हो जाएंगे। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उज्जैन में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होने की संभावना है।
इस परियोजना का लाभ केवल धार्मिक पर्यटन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों को भी बड़ा फायदा मिलने वाला है। इंदौर, देवास और पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र जैसे बड़े औद्योगिक इलाकों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से माल परिवहन तेज होगा। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और उद्योगों के लिए व्यापारिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सड़क परियोजना मालवा क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति दे सकती है।