LPG की कमी के बीच होटल-रेस्टोरेंट को सलाह, गैस बचाने के लिए चूल्हे की बजाय तंदूर में बनाएं रोटी

देशभर में बढ़ रहे गैस संकट का असर अब मध्य प्रदेश में भी साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई होटलों में खाना बनाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी गंभीर स्थिति को लेकर होटल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुमित सूरी ने राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर होटल व्यवसायियों की परेशानियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अचानक कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई बंद होने से हजारों ग्राहकों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और होटल उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मीडिया से चर्चा करते हुए सुमित सूरी ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट सिर्फ व्यापारिक संस्थान नहीं हैं, बल्कि यात्रियों और मेहमानों के लिए आवश्यक सेवाएं भी प्रदान करते हैं। कई लोग काम या पर्यटन के सिलसिले में अपने घरों से दूर रहते हैं और उन्हें भोजन के लिए होटल और रेस्टोरेंट पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अगर गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो जाती है तो मेहमानों को समय पर भोजन उपलब्ध कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि होटल और रेस्टोरेंट को इमरजेंसी सेवा की श्रेणी में शामिल किया जाए, ताकि इस संकट के समय कम से कम सीमित मात्रा में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

सूरी ने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास गैस की उपलब्धता कम है तो होटल उद्योग को मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या कम की जा सकती है, लेकिन सप्लाई को पूरी तरह बंद कर देना किसी भी स्थिति में सही नहीं है। उनका कहना था कि अचानक आपूर्ति रोक देने से होटल संचालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है और ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए सरकार को इस विषय में संतुलित निर्णय लेते हुए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे गैस की बचत भी हो और होटल व्यवसाय भी प्रभावित न हो।

होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के सामने यह मुद्दा भी उठाया कि यदि होटल गैस की जगह इंडक्शन कुकिंग या डीजल भट्टी जैसे विकल्पों का उपयोग करना चाहें तो इसके लिए भी पर्याप्त समय चाहिए। नई व्यवस्था तैयार करने, उपकरण लगाने और किचन को व्यवस्थित करने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा। ऐसे में उन्होंने मांग की कि जब तक होटल पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर लेते, तब तक कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई जारी रखी जाए ताकि होटल में ठहरे मेहमानों को बिना किसी बाधा के भोजन मिल सके।

इस संकट से निपटने के लिए होटल एसोसिएशन ने अपने स्तर पर भी कुछ कदम उठाए हैं। एसोसिएशन ने प्रदेशभर के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को गैस की खपत कम करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन गाइडलाइनों के तहत सुझाव दिया गया है कि चूल्हे पर रोटी बनाने के बजाय तंदूर की रोटी परोसने को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा शादी समारोह, पार्टियों और बड़े आयोजनों में भोजन के मेन्यू को सीमित रखने की सलाह दी गई है, ताकि अनावश्यक गैस की खपत को कम किया जा सके।

सुमित सूरी के मुताबिक पूरे प्रदेश में लाखों होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालित होते हैं और ये सभी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी देते हैं। अगर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो इसका सीधा असर न सिर्फ होटल व्यवसाय पर पड़ेगा, बल्कि पर्यटन उद्योग और स्थानीय रोजगार पर भी पड़ेगा। इससे हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है और प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या बढ़ सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य तौर पर एक मध्यम या बड़े होटल में प्रतिदिन लगभग 10 से 12 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की खपत होती है। ऐसे में अगर सिलेंडर मिलना बंद हो जाए तो होटल और रेस्टोरेंट का संचालन लगभग असंभव हो जाएगा। इस वजह से होटल एसोसिएशन ने सरकार से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की है, ताकि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग सामान्य रूप से काम कर सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने होटल एसोसिएशन की बात ध्यानपूर्वक सुनने के बाद संबंधित विभागों को इस समस्या का जल्द समाधान तलाशने के निर्देश देने का आश्वासन दिया है। होटल एसोसिएशन को उम्मीद है कि सरकार इस गंभीर स्थिति को समझते हुए जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेगी। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो पूरे प्रदेश में होटल और रेस्टोरेंट का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को बड़ा झटका लगने की आशंका है।