Delhi News: भारतीय संसद का बजट सत्र गुरुवार को भारी हंगामे और राजनीतिक बयानबाजी की भेंट चढ़ गया। एक तरफ जहाँ विपक्षी दलों ने बढ़ती महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की किल्लत को लेकर सदन से लेकर परिसर तक मोर्चा खोल दिया, वहीं दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद सदन की कमान दोबारा संभाली।
‘नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब’: विपक्ष का तीखा प्रदर्शन
गुरुवार सुबह जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने ‘सिलेंडर संकट’ को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने अनोखा प्रदर्शन किया। विपक्षी खेमे से “नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब” के नारे गूंजे।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि देश के मुखिया खुद घबराए हुए हैं। राहुल ने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जनता से कहते हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन हकीकत में वह खुद पैनिक में हैं। कल सदन में उनकी कुर्सी खाली थी, जो उनके डर को दर्शाती है।” राहुल ने इस घबराहट के पीछे ‘एप्स्टीन-अदाणी’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि सरकार बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
ओम बिरला की घर वापसी: “लोकतंत्र की गरिमा सर्वोपरि”
बुधवार को विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद, स्पीकर ओम बिरला गुरुवार को दोबारा अपनी कुर्सी पर लौटे। सदन को संबोधित करते हुए वह काफी भावुक और गंभीर नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन किसी की व्यक्तिगत इच्छा से नहीं, बल्कि नियमों और प्रक्रियाओं से चलेगा।
स्पीकर ने कहा, “जब मैं विदेश जाता हूं, तो मुझे भारत के लोकतंत्र पर गर्व होता है। लेकिन जब सदन में शोर-शराबा और हंगामा होता है, तो देश की जनता में निराशा फैलती है।” उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे सदन की प्रतिष्ठा बनाए रखने में सहयोग करें।
महिला सांसदों और निलंबन पर स्पीकर की सफाई
अपने संबोधन के दौरान ओम बिरला ने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि महिला सांसदों को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उनके कार्यकाल में लगभग सभी महिला सदस्यों ने अपनी बात रखी है। उन्होंने बजट चर्चा के दौरान महिला सांसदों द्वारा ट्रेजरी बेंच की ओर जाकर नारेबाजी करने की घटना को ‘अप्रत्याशित’ करार दिया।
सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कभी-कभी कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “मेरा सभी सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर व्यक्तिगत संबंध है, लेकिन व्यवस्था बनाए रखना मेरी जिम्मेदारी है।”
राज्यसभा में गूंजा कश्मीर का मुद्दा
लोकसभा में जहाँ सिलेंडर और अदाणी पर रार जारी थी, वहीं राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले का मुद्दा उठाते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही
विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में महंगाई, बेरोजगारी और अदाणी मामले पर विपक्ष का तेवर और कड़ा होने वाला है।