Air fare Surges: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान पर साफ दिखने लगा है। पहले से ही कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब एक नए आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में जहां आम आदमी के लिए रोटी-कपड़ा जुटाना मुश्किल था, वहीं अब हवाई सफर करना भी किसी लग्जरी से कम नहीं रह गया है। ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के कारण घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के किरायों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
फ्यूल की कीमतों में 82% का तगड़ा उछाल
हवाई टिकटों की कीमतों में लगी इस आग की मुख्य वजह जेट फ्यूल (ATF) के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात बनने के बाद पाकिस्तान में जेट फ्यूल की कीमत 154 PKR प्रति लीटर से बढ़कर सीधी 342 PKR प्रति लीटर पर पहुंच गई है। ईंधन में आई यह 82 प्रतिशत की वृद्धि एयरलाइन कंपनियों के लिए भारी पड़ रही है। हालांकि, कंपनियों ने बेस फेयर में सीधे बदलाव के बजाय 20 से 100 डॉलर तक का फ्यूल सरचार्ज वसूलना शुरू कर दिया है।
आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ हवाई सफर
कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे मुख्य शहरों के बीच सफर करने वाले मुसाफिरों पर बोझ बढ़ गया है:
घरेलू उड़ानें: प्रति यात्री किराए में 2,800 से 5,000 PKR की वृद्धि हुई है। जो सफर पहले 10,000-15,000 PKR में होता था, वह अब 17,000 से 20,000 PKR के पार चला गया है।
अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें: विदेशी दौरों के लिए किराए में 10,000 से 28,000 PKR तक का उछाल आया है।
लंबी दूरी का सफर: मैनचेस्टर और टोरंटो जैसे शहरों के लिए इकोनॉमी क्लास का एक तरफ का टिकट अब 2.5 लाख PKR तक पहुंच गया है।
जनता में भारी आक्रोश और टूरिज्म पर खतरा
रमजान के पवित्र महीने में मांग अधिक होने के कारण यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग सरकार और एयरलाइन कंपनियों की जमकर आलोचना कर रहे हैं। विशेष रूप से विदेश में पढ़ने वाले छात्र और रोजी-रोटी के लिए बाहर जाने वाले मजदूर इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो पाकिस्तान का टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह धराशायी हो सकता है। महंगे टिकटों के डर से घरेलू और विदेशी सैलानी यात्रा टाल रहे हैं, जिससे विमानन उद्योग को भारी घाटा होने की आशंका है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान की जनता अब हवाई जहाज छोड़ ट्रेन और बस जैसे सस्ते विकल्पों की ओर रुख करने को मजबूर है।