RSS का बड़ा संगठनात्मक कायाकल्प: MP में मालवा, महाकौशल और मध्यभारत प्रांत खत्म; अब एक प्रदेश में 9 संभाग बनाने की तैयारी

Bhopal/Indore: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संगठन के ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा और युगांतकारी बदलाव करने जा रहा है। संघ ने दशकों पुरानी प्रांतीय व्यवस्था को समाप्त कर ‘विकेंद्रीकरण’ का नया मॉडल तैयार किया है। इसके तहत मध्यप्रदेश में वर्तमान में सक्रिय तीन प्रमुख प्रांतों—मालवा, मध्यभारत और महाकौशल—के अस्तित्व को खत्म कर पूरे राज्य के लिए एक एकीकृत कमान और नौ नए संभाग बनाने का निर्णय लिया गया है।
हाल ही में संपन्न हुई संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस सांगठनिक पुनर्गठन पर मुहर लगाई गई। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को तेज करना और युवा कार्यकर्ताओं को सीधे नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ना है। इंदौर में मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री इस नई व्यवस्था के ब्लूप्रिंट पर विस्तार से जानकारी साझा करेंगे।
तीन प्रांतों की जगह एक ‘प्रदेश प्रचारक
वर्तमान व्यवस्था में मध्यप्रदेश तीन स्वतंत्र इकाइयों (प्रांतों) में बंटा हुआ था, जिनमें मालवा (इंदौर मुख्यालय), मध्यभारत (ग्वालियर-भोपाल) और महाकौशल (जबलपुर) शामिल थे। इन तीनों प्रांतों के अपने अलग प्रांत प्रचारक और कार्यकारिणी होती थी।
नई व्यवस्था के लागू होते ही:
  1. पूरे मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी अब केवल एक प्रदेश प्रचारक और उनकी राज्य कार्यकारिणी के पास होगी।
  2. वर्तमान में कार्यरत तीन प्रांत प्रचारकों—राजमोहन (मालवा), विमल गुप्ता (मध्यभारत) और ब्रजकांत चतुर्वेदी (महाकौशल)—में से किसी एक को पूरे प्रदेश की कमान सौंपी जा सकती है।
  3. शेष दो वरिष्ठ प्रचारकों को अखिल भारतीय स्तर पर या संघ के अनुषांगिक संगठनों (जैसे भारतीय मजदूर संघ या विद्या भारती) में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय भूमिकाएं दी जा सकती हैं।
9 शहरों को बनाया गया संभागीय केंद्र
संघ ने प्रशासनिक सुगमता और काम के विस्तार के लिए प्रदेश को 9 प्रमुख संभागों में बांटने की तैयारी की है। ये संभाग निम्नलिखित शहरों को केंद्र बनाकर संचालित होंगे:
  • इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, खंडवा और नर्मदापुरम।
इन संभागों में ‘विभाग प्रचारकों’ की जगह अब ‘संभागीय प्रचारक’ नियुक्त किए जाएंगे। प्रत्येक संभाग की अपनी एक सशक्त कार्यकारिणी होगी, जिसमें लगभग 30 पदाधिकारी शामिल होंगे। यह टीम सीधे प्रदेश प्रचारक को रिपोर्ट करेगी, जिससे जिला स्तर के कार्यकर्ताओं का समन्वय सीधे बड़े नेतृत्व से हो सकेगा।
युवाओं को केंद्र में रखकर ‘शताब्दी संकल्प’
संघ इस बदलाव को अपने शताब्दी वर्ष के संकल्प “युवा संघर्ष और संघर्ष का युवा वर्ष” से जोड़कर देख रहा है। संघ का मानना है कि पुरानी प्रांतीय व्यवस्था में कई बार फाइलें और निर्णय प्रक्रिया लंबी हो जाती थी। नई व्यवस्था में पदानुक्रम (Hierarchy) कम होने से युवाओं को जिम्मेदारी जल्दी मिलेगी और संघ का नेटवर्क गांव-गांव तक और अधिक प्रभावी ढंग से फैलेगा।
राष्ट्रव्यापी प्रभाव
यह केवल मध्यप्रदेश तक सीमित प्रयोग नहीं है। संघ की योजना देशभर में करीब 80 नए संभाग गठित करने की है। मध्यप्रदेश इस नई व्यवस्था को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। आने वाले समय में जो विभाग प्रचारक नई संभागीय व्यवस्था के मानकों में फिट नहीं होंगे, उन्हें संगठन के अन्य आयामों जैसे सामाजिक समरसता या पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में तैनात किया जाएगा।
इस पुनर्गठन से स्पष्ट है कि आरएसएस अपनी 100 साल की यात्रा पूरी करने के बाद अगले शतक के लिए खुद को अधिक आधुनिक, चुस्त और तकनीक-सक्षम संगठन के रूप में तैयार कर रहा है।