मीडिल ईस्ट तनाव के चलते रूपया कमजोर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले निचले स्तर पर भारतीय करेंसी 

पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ता तनाव और ईरान युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ जहाँ घरेलू शेयर बाजार अपनी मजबूती बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय करेंसी यानी रुपया (INR) लगातार कमजोर होता जा रहा है। 17 मार्च 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे टूटकर 92.43 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

क्यों सहम रही है भारतीय करेंसी?

विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये की इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. कच्चे तेल की बेलगाम कीमतें: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 1.03% की बढ़त के साथ 104.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

  2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Outflow): भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बीते शुक्रवार को ही निवेशकों ने करीब 10,716.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार में डॉलर की कमी हुई है।

  3. विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों ने चिंता और बढ़ा दी है। 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.810 अरब डॉलर रह गया है। भंडार में यह कमी आरबीआई द्वारा रुपये को संभालने की कोशिशों या वैल्युएशन लॉस के कारण हो सकती है।

बाजार का विरोधाभास: शेयर बढ़े, मुद्रा गिरी

हैरानी की बात यह है कि जहाँ रुपया ऐतिहासिक गिरावट झेल रहा है, वहीं शेयर बाजार में तेजी का रुख है। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में करीब 400 अंकों तक उछलकर 76,000 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी हरे निशान में कारोबार कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध का संकट और गहराया, तो बाजार की यह बढ़त भी अस्थिरता की भेंट चढ़ सकती है।

आगे की राह…

डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट (99.98) के बावजूद रुपये का संभलना मुश्किल लग रहा है। यदि ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार जाता है, तो रुपया 93 के स्तर को भी छू सकता है। आने वाले दिनों में आरबीआई के हस्तक्षेप और वैश्विक कूटनीतिक वार्ताओं पर सबकी नजर रहेगी।

विशेषज्ञ राय: “जब तक पश्चिम एशिया में शांति के संकेत नहीं मिलते, आयातकों के लिए डॉलर महंगा बना रहेगा, जिसका सीधा असर भारत में महंगाई पर पड़ सकता है।”