Share Market Update: भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 मार्च 2026 का दिन किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रहा। वैश्विक युद्ध के साये और बैंकिंग क्षेत्र में मची उथल-पुथल ने बाजार को धराशायी कर दिया। सेंसेक्स 2497 अंक (3.26%) की भारी गिरावट के साथ 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक (3.26%) टूटकर 23,002 के स्तर पर आ गया। यह जून 2024 के बाद बाजार में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार की तबाही के 3 प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में आई इस सुनामी के पीछे तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कारण रहे:
युद्ध और सप्लाई चेन का संकट: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। युद्ध की आशंका ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स (शेयर) से पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर निवेश करने के लिए मजबूर किया है।
कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल के दाम 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गए हैं, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
ग्लोबल मार्केट का दबाव: अमेरिकी और एशियाई बाजारों में मची बिकवाली का सीधा नकारात्मक असर भारतीय सेंटीमेंट्स पर पड़ा।
HDFC बैंक में इस्तीफा और बैंकिंग शेयर्स में भगदड़
बाजार को सबसे ज्यादा चोट बैंकिंग सेक्टर से लगी। HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती द्वारा नैतिकता और बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दिए गए इस्तीफे ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया।
इस खबर के बाद HDFC बैंक का शेयर 5.11% गिरकर ₹800 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, स्थिति को संभालने के लिए RBI की मंजूरी से केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
एक ही दिन में ₹13 लाख करोड़ डूबे
बाजार में आई इस गिरावट ने देश के करोड़ों निवेशकों को खून के आंसू रुलाए हैं। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप कल के ₹439 लाख करोड़ से घटकर ₹426 लाख करोड़ पर आ गया। इसका अर्थ है कि केवल एक कारोबारी सत्र में निवेशकों की 13 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति स्वाहा हो गई।
विशेष रूप से बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, जिससे इंडेक्स नीचे की ओर तेजी से फिसलता चला गया।