इंदौर में ‘विक्रमोत्सव’ का शंखनाद: हिंदू नववर्ष पर कोटि सूर्योपासना; नाटक के जरिए जीवंत हुई सम्राट विक्रमादित्य की गौरव गाथा

Indore News: भारतीय कालगणना के आधार स्तंभ और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में आज इंदौर के ऐतिहासिक गांधी हॉल में ‘विक्रमोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत इंदौर में ‘कोटि सूर्योपासना’ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए हिंदू नववर्ष (गुड़ी पड़वा) का स्वागत किया गया।

भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर किया। इस अवसर पर भारतीय पंचांग और विक्रम संवत की महत्ता को रेखांकित करते हुए सूर्योपासना की गई। कार्यक्रम में विधायक महेंद्र हार्डिया, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

नाटक के जरिए सम्राट विक्रमादित्य का दर्शन

आयोजन का मुख्य आकर्षण रंगरूपिया थिएटर के रवि जोशी और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत नाटक रहा। सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को उस कालखंड में पहुँचा दिया जब भारत अपनी सांस्कृतिक और न्यायपूर्ण व्यवस्था के शिखर पर था। नाटक में विक्रमादित्य की वीरता, उनकी प्रसिद्ध न्यायप्रियता और विक्रम संवत की शुरुआत के ऐतिहासिक तथ्यों को बड़ी ही कुशलता से प्रदर्शित किया गया। उपस्थित जनसमुदाय और स्कूली छात्र-छात्राओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस प्रस्तुति को सराहा।

“भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर” – मंत्री सिलावट

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सभी को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के संकल्पों के अनुरूप आज पूरा प्रदेश अपनी संस्कृति, आस्था और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भारत पुनः अपनी खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को प्राप्त कर विश्व गुरु बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

विक्रम संवत: विज्ञान और भूगोल का संगम

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सूर्योपासना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शुरू किया गया विक्रम संवत केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारत की भौगोलिक स्थिति और खगोलीय विज्ञान के अनुरूप संचालित एक वैज्ञानिक पंचांग है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी को हमारी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना और अपनी जड़ों के प्रति गर्व महसूस कराना है।

छात्रों की सहभागिता और उल्लास

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों के लिए स्वल्पाहार की विशेष व्यवस्था की गई थी। पूरे गांधी हॉल परिसर में नववर्ष का उत्साह दिखाई दिया, जहाँ एक ओर धार्मिक अनुष्ठान हुए तो दूसरी ओर ऐतिहासिक गौरव गाथाओं का गान हुआ।