HDFC बैंक चेयरमैन के इस्तीफे से शेयर 5% टूटा: केकी मिस्त्री ने संभाली कमान

Mumbai News: देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता, HDFC बैंक में बुधवार देर रात हुए एक नाटकीय घटनाक्रम ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और शेयर बाजार को हिलाकर रख दिया है।

बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के पीछे बताए गए कारणों ने बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और आंतरिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

“नैतिकता और मूल्यों से समझौता नहीं”: चक्रवर्ती का कड़ा प्रहार

1985 बैच के पूर्व IAS अधिकारी अतनु चक्रवर्ती ने अपने त्याग पत्र में कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने सीधे तौर पर बैंक के ‘इंटरनल कल्चर’ (आंतरिक संस्कृति) पर निशाना साधते हुए कहा:

“पिछले दो वर्षों के दौरान मैंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाओं और कार्य-प्रणालियों को देखा है, जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता (Ethics) के अनुरूप नहीं हैं। एक स्वतंत्र निदेशक और चेयरमैन के रूप में, मैं ऐसी प्रथाओं के साथ तालमेल नहीं बिठा सकता।”

चक्रवर्ती का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे आर्थिक मामलों के सचिव जैसे उच्च पदों पर रह चुके हैं और उन्हें देश की अर्थव्यवस्था की गहरी समझ है। अप्रैल 2021 में नियुक्त होने के बाद, उन्हें मई 2024 में दोबारा तीन साल के लिए चुना गया था, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया।

बाजार में कोहराम: निवेशकों के डूबे अरबों रुपए

इस्तीफे की खबर जैसे ही गुरुवार सुबह बाजार में फैली, HDFC बैंक के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। बैंक का शेयर 5% (करीब ₹43) टूटकर ₹800 के स्तर पर आ गया। गौरतलब है कि इस साल अब तक HDFC बैंक का शेयर करीब 20% की गिरावट झेल चुका है। बैंकिंग इंडेक्स पर इसके भारी वेटेज के कारण निफ्टी और सेंसेक्स में भी आज बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

केकी मिस्त्री: 3 महीने के लिए अंतरिम कमान

बोर्ड ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी के साथ केकी मिस्त्री को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है।

स्वतंत्र निदेशकों को स्टॉक विकल्प दिए जाने चाहिए: केकी मिस्त्री

  • अनुभव: मिस्त्री HDFC लिमिटेड के बैंक में विलय से पहले उसके वाइस चेयरमैन और CEO रह चुके हैं।

  • भरोसा: पद संभालते ही मिस्त्री ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि बैंक की वित्तीय स्थिति पूरी तरह स्थिर है और बोर्ड ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

RBI की सफाई: “घबराने की जरूरत नहीं”

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अपना पक्ष रखा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि:

  1. HDFC बैंक एक ‘सिस्टेमिकली इम्पोर्टेन्ट बैंक’ (D-SIB) है, जिसका डूबना अर्थव्यवस्था के लिए संभव नहीं है।

  2. बैंक के पास पर्याप्त पूंजी (Capital) और नकदी (Liquidity) उपलब्ध है।

  3. गवर्नेंस को लेकर फिलहाल कोई ‘गंभीर चिंता’ की बात नहीं है और मैनेजमेंट टीम पूरी तरह सक्षम है।

मर्जर के बाद की चुनौतियां

अतनु चक्रवर्ती ने अपने कार्यकाल में HDFC लिमिटेड और HDFC बैंक के ऐतिहासिक विलय को सबसे बड़ी उपलब्धि बताया, जिससे यह दुनिया के सबसे मूल्यवान बैंकों की सूची में शामिल हो गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े मर्जर के बाद बैंक के भीतर सांस्कृतिक तालमेल बैठाने में कुछ दिक्कतें आ रही हैं, जिसका संकेत चक्रवर्ती के पत्र से मिलता है।

नॉलेज कॉर्नर: क्यों जरूरी है RBI की मंजूरी?

बैंकिंग क्षेत्र में चेयरमैन या CEO की नियुक्ति के लिए ‘फिट एंड प्रॉपर’ (Fit and Proper) टेस्ट अनिवार्य होता है। चूंकि बैंक में आम जनता की गाढ़ी कमाई जमा होती है, इसलिए RBI यह सुनिश्चित करता है कि शीर्ष नेतृत्व पर बैठा व्यक्ति न केवल अनुभवी हो, बल्कि उसकी सत्यनिष्ठा (Integrity) पर कोई दाग न हो।

आगे क्या? अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केकी मिस्त्री के नेतृत्व में बोर्ड अगले 90 दिनों में किस ‘फुल-टाइम’ चेयरमैन का चुनाव करता है और चक्रवर्ती द्वारा उठाए गए नैतिक सवालों का बैंक प्रबंधन क्या ठोस जवाब देता है।