Mathura/Vrindavan News: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार सुबह भक्ति और आध्यात्म के केंद्र वृंदावन पहुंचीं। उत्तर प्रदेश के अपने तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन, राष्ट्रपति ने विख्यात संत प्रेमानंद महाराज से उनके आश्रम ‘केलीकुंज’ में मुलाकात की। सुबह लगभग 7 बजे, जब वृंदावन की गलियां हल्की बारिश से सराबोर थीं, राष्ट्रपति अपने पूरे परिवार के साथ संत के दर्शन करने पहुंची।
जैसे ही राष्ट्रपति मुर्मू संत प्रेमानंद के समक्ष पहुंचीं, उन्होंने अत्यंत सादगी के साथ हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया। संत प्रेमानंद ने भी चिर-परिचित अंदाज में ‘राधे-राधे’ कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। आश्रम में मौजूद अन्य संतों ने राष्ट्रपति का माला पहनाकर और चुनरी ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया।
जन्मदिन की दी बधाई और की आध्यात्मिक चर्चा
यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें गहरी आध्यात्मिक झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति ने प्रेमानंद महाराज को उनके 56वें जन्मदिन की बधाई दी, जो उन्होंने एक दिन पूर्व यानी 19 मार्च को मनाया था। बंद कमरे में हुई लगभग 25 मिनट की इस चर्चा के दौरान राष्ट्रपति काफी भाव-विभोर नजर आईं। इस खास पल में उनके साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम और दोनों नातिनें आद्याश्री व नित्याश्री भी मौजूद थीं।
अयोध्या से मथुरा तक का भक्तिमय सफर
राष्ट्रपति का यह दौरा पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ है।
गुरुवार (अयोध्या): राष्ट्रपति ने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए और भव्य राम मंदिर में ‘रामयंत्र’ की स्थापना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें मंदिर निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया।
गुरुवार शाम (मथुरा): अयोध्या से सीधे मथुरा पहुँचने के बाद उन्होंने इस्कॉन मंदिर में राधा-श्याम सुंदर की पूजा की। वहां उन्होंने न केवल मंदिर की नक्काशी की सराहना की, बल्कि छोटे बच्चों को चॉकलेट बांटकर उनका उत्साह भी बढ़ाया। इसके पश्चात उन्होंने प्रेम मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया।
आज के आगामी कार्यक्रम
संत प्रेमानंद जी से भेंट के बाद राष्ट्रपति का अगला पड़ाव बाबा नीब करौरी महाराज का आश्रम होगा। इसके बाद वह रामकृष्ण मिशन अस्पताल जाएंगी, जहाँ वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे आधुनिक ‘कैंसर यूनिट’ का उद्घाटन कर स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी सौगात देंगी।
यह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मथुरा का दूसरा दौरा है। इससे पहले वह 25 सितंबर को बांके बिहारी के दर्शन करने आई थीं। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभु श्रीराम और कृष्ण की इस पावन धरा पर कदम रखना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है।