दुनिया का सबसे बड़ा गैस हब ‘रास लफान’ दहला: ईरान के हमले से कतर को अरबों का नुकसान, क्या भारत में महंगा होगा गैस सिलेंडर?

New Delhi: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जो पूरी दुनिया की रसोई और अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। ईरान ने कतर के औद्योगिक शहर और दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (LNG) हब ‘रास लफान’ पर भीषण मिसाइल हमले किए है।
इस हमले ने न केवल कतर की ऊर्जा क्षमताओं को चोट पहुँचाई है, बल्कि भारत सहित उन तमाम देशों की चिंता बढ़ा दी है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर निर्भर हैं। इन संयंत्रों की मरम्मत में 3 से 5 साल का समय लग सकता है, जिसका अर्थ है कि दुनिया को लंबे समय तक महंगे ईंधन के दौर से गुजरना पड़ सकता है।
ताबड़तोड़ मिसाइल हमले: ठप हुआ उत्पादन
ईरान की ओर से दो चरणों में हमले किए गए, जिससे कतर की गैस सुविधाओं को अपूरणीय क्षति हुई है:
  • पहला हमला (18 मार्च): ईरान ने पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर ‘पर्ल जीटीएल’ (Pearl GTL) प्लांट को निशाना बनाया। यह प्लांट प्राकृतिक गैस को डीजल और मिट्टी के तेल जैसे ईंधनों में बदलता है। इस हमले में पाइपलाइन नेटवर्क और स्टोरेज टैंक पूरी तरह तबाह हो गए।
  • दूसरा हमला (19 मार्च): अगले दिन ईरान ने सीधे रास लफान की दो प्रोडक्शन यूनिट और 14 एलएनजी ट्रांस (गैस को तरल बनाने वाली इकाइयां) पर हमला किया।
कतर के ऊर्जा मंत्री साद-अल-काबी ने इसे एक ‘बुरा सपना’ करार देते हुए कहा कि रमजान के पवित्र महीने में एक मुस्लिम देश द्वारा ऐसा हमला अकल्पनीय था। इस हमले से कतर की 17% निर्यात क्षमता खत्म हो गई है, जिससे सालाना 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
भारत पर क्या होगा असर: रसोई गैस और गाड़ी चलाना होगा महंगा?
भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आयात करता है। आपूर्ति में इस बड़ी बाधा का सीधा असर निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ेगा:
  1. CNG और PNG की कीमतें: घरेलू स्तर पर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी (CNG) की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की आशंका है।
  2. LPG सिलेंडर: रसोई गैस (LPG) का एक बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग से ही प्राप्त होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की किल्लत होने पर घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
  3. औद्योगिक लागत: बिजली उत्पादन और उर्वरक (फर्टिलाइजर) क्षेत्र में गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, जिससे खेती और बिजली की लागत भी प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक संकट: यूरोप से लेकर एशिया तक हाहाकार
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इस हमले की तपिश महसूस करेगी:
  • यूरोप: यूक्रेन युद्ध के बाद से यूरोप गैस के लिए कतर पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद यूरोप में गैस की कीमतें 30-35% तक उछल सकती हैं।
  • चीन, जापान और दक्षिण कोरिया: इन देशों ने 2025 में कतर के कुल निर्यात का 90% हिस्सा खरीदा था। अब इन्हें मजबूरन ‘स्पॉट मार्केट’ से ऊंचे दामों पर गैस खरीदनी होगी।
  • पाकिस्तान और बांग्लादेश: पहले से ही ऊर्जा संकट और आर्थिक कंगाली से जूझ रहे इन देशों के लिए आपूर्ति में कमी उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह पटरी से उतार सकती है।