CM यादव का सख्त रूख: हवालाकांड में गुना SP अंकित सोनी को हटाया; सीधी कलेक्टर को भी बदला

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। गुना में हुए बहुचर्चित हवालाकांड और सीधी में जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री ने दोनों जिलों के शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिराई है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

गुना: हवालाकांड में फंसे SP अंकित सोनी, हितिका वसल संभालेंगी कमान

गुना में पुलिस की छवि धूमिल करने वाले 1 करोड़ रुपये के हवालाकांड ने एसपी अंकित सोनी की कुर्सी छीन ली है। मामला गुजरात के एक जीरा कारोबारी से जुड़ा है, जिसकी कार से पुलिस ने भारी नकदी पकड़ी थी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने 20 लाख रुपये की रिश्वत लेकर कारोबारी को छोड़ दिया। मामला तब तूल पकड़ा जब गुजरात के एक IPS अधिकारी के दखल के बाद धरनावदा पुलिस ने लिए गए पैसे वापस किए।

इस भ्रष्टाचार की आंच एसपी तक पहुँचने के बाद डॉ. यादव ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) नियुक्त किया है। उनकी जगह इंदौर की 15वीं बटालियन की कमांडेंट हितिका वसल को गुना का नया एसपी बनाया गया है। इससे पहले इस मामले में थाना प्रभारी समेत 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है।

सीधी: जनप्रतिनिधियों की नाराजगी पड़ी भारी, कलेक्टर बदले

सीधी जिले में भी मुख्यमंत्री ने बड़ा एक्शन लिया। मिर्जापुर दौरे से सीधे सीधी पहुँचे मुख्यमंत्री को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता से कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें मिलीं। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कड़ा फैसला लेते हुए सोमवंशी को हटाकर आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में ओएसडी बना दिया।

उनकी जगह 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा को सीधी का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। विकास मिश्रा इससे पहले डिंडौरी में कलेक्टर रह चुके हैं और वर्तमान में मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ थे। इसके साथ ही जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पीएस धनवाल को भी तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं।

“मैदानी कार्रवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं”: मुख्यमंत्री

इस कार्रवाई पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अधिकारियों को अपनी जवाबदेही समझनी होगी। उन्होंने कहा:

“अगर मैदानी स्तर पर काम में लापरवाही या भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती हैं, तो ऐसे अधिकारियों को फील्ड में रहने का हक नहीं है। उन्हें वल्लभ भवन (सचिवालय) में बैठाना ही बेहतर है।”

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री की इस ‘संडे सर्जरी’ ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन उनकी प्राथमिकता है। अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि जनता और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।