LPG संकट: अब 14 किलो के सिलेंडर में मिलेगी सिर्फ 10KG गैस, ईरान जंग के बीच तेल कंपनियों का ‘राशनिंग’ प्लान तैयार

New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और सप्लाई चेन टूटने के कारण भारत में रसोई गैस का संकट गहराता जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाने की तैयारी कर ली है।
अब घरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक 14.2 किलो के एलपीजी (LPG) सिलेंडर में केवल 10 किलो गैस भरकर दी जाएगी। इस ‘राशनिंग’ का मुख्य उद्देश्य सीमित स्टॉक को देश के ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुँचाना है।
युद्ध का असर: होर्मुज रूट बंद होने से फँसे 6 भारतीय टैंकर
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि:
  • फारस की खाड़ी में फंसे जहाज: भारत के 6 गैस टैंकर फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट: यह 167 किमी लंबा जलमार्ग युद्ध के कारण असुरक्षित हो गया है। भारत अपना 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है, जो अब लगभग बंद है।
  • कतर का प्लांट बंद: ईरान के हमलों में दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी हब, कतर के ‘रास लफ्फान’ प्लांट को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे वैश्विक सप्लाई का 20% हिस्सा रुक गया है।
10 किलो गैस का गणित: एक महीना चलेगा काम
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों ने डेटा विश्लेषण के बाद यह पाया है कि 14.2 किलो का सिलेंडर औसतन 35 से 40 दिन चलता है। यदि इसमें 10 किलो गैस दी जाए, तो एक सामान्य परिवार का काम लगभग एक महीने (30 दिन) तक चल जाएगा। इस कटौती से बचने वाली गैस को उन क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा जहाँ वर्तमान में भारी किल्लत है।
दाम कम होंगे, स्टिकर से होगी पहचान
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सिलेंडर की कीमतों में भी उसी अनुपात में कटौती की जाएगी।
  • कीमत: वर्तमान में दिल्ली में सिलेंडर ₹913 का है। 10 किलो गैस होने पर ग्राहकों को केवल उतनी ही मात्रा के पैसे चुकाने होंगे।
  • पहचान: ग्राहकों में भ्रम न फैले, इसके लिए इन विशेष सिलेंडरों पर एक नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिस पर गैस की सही मात्रा और संशोधित दाम स्पष्ट रूप से लिखे होंगे।
चुनौतियां और बॉटलिंग प्लांट में बदलाव
इस योजना को लागू करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। देश भर के बॉटलिंग प्लांट्स में लगे ‘फिलिंग सिस्टम’ और वजन करने वाली मशीनों को री-कैलिब्रेट (Re-calibrate) करना होगा। साथ ही, इसके लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से कई रेगुलेटरी मंजूरियों की आवश्यकता होगी। अधिकारियों को अंदेशा है कि अचानक किए गए इस बदलाव से जनता में असंतोष पैदा हो सकता है, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ चुनाव नजदीक हैं।
LPG संकट को लेकर अब तक सरकार के कड़े कदम
सरकार ने मार्च की शुरुआत से ही गैस बचाने के लिए कई पाबंदियां लगाई हैं:
  • 6 मार्च: बुकिंग के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड शुरू किया गया।
  • 9 मार्च: शहरों में इस गैप को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया।
  • 12 मार्च: ग्रामीण इलाकों के लिए बुकिंग का अंतर 45 दिन किया गया।
  • 14 मार्च: पीएनजी (पाइप गैस) कनेक्शन वाले घरों के लिए एलपीजी सिलेंडर रखना गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना सिलेंडर सरेंडर करना होगा।
निष्कर्ष
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने सप्लाई की स्थिति को ‘चिंताजनक’ बताया है। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ सुरक्षित नहीं होता, तब तक देशवासियों को गैस के सीमित उपयोग की आदत डालनी होगी। सरकार का यह 10 किलो वाला फार्मूला संकट काल में ‘सबके पास गैस’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।