मिडिल ईस्ट महाजंग: ईरान ने रोका पाकिस्तानी जहाज, भारत के 5 टैंकर सुरक्षित निकले

तेहरान/दुबई : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का आज 26वां दिन है। यह संघर्ष अब केवल मिसाइल हमलों तक सीमित न रहकर वैश्विक समुद्री व्यापार और कूटनीतिक दरारों में तब्दील हो चुका है। ईरान के शक्तिशाली संगठन ‘इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अपनी पकड़ और सख्त कर दी है।

पाकिस्तान का जहाज रोका, भारत के लिए रास्ता साफ
ताजा घटनाक्रम में, IRGC की नौसेना ने कराची जा रहे ‘सेलेन’ (Selen) नाम के एक मालवाहक जहाज को होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोक दिया। नेवी कमांडर अलीरेजा तंगसीरी के अनुसार, इस जहाज के पास क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं थी। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले प्रत्येक जहाज को ईरानी अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।
हैरानी की बात यह है कि यह कार्रवाई तब हुई जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मध्यस्थता के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशिकयान से संपर्क में हैं। वहीं, भारत के लिए स्थिति फिलहाल सामान्य दिख रही है। जंग शुरू होने के बाद से अब तक भारत के 5 बड़े तेल और एलपीजी टैंकर (जग वसंत, पाइन गैस, शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी) सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुके हैं।
जंग की विभीषिका: मासूमों की बलि और आर्थिक तबाही
ईरान के भीतर जमीनी हालात अत्यंत चिंताजनक हैं। अब तक इस युद्ध में करीब 1,500 लोगों की जान जा चुकी है और 18,500 से अधिक घायल हैं।
  • बच्चों पर कहर: 28 फरवरी को एक स्कूल पर हुए हमले में 168 बच्चों की मौत ने दुनिया को झकझोर दिया था।
  • स्वास्थ्य संकट: जंग में 55 स्वास्थ्यकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से 11 शहीद हो चुके हैं।
  • इराक में हमला: पश्चिमी इराक के अनबार में ‘हश्द अल-शाबी’ (पैरामिलिट्री ठिकाने) पर फाइटर जेट्स से दो मिसाइलें दागी गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ऑस्ट्रेलिया का कड़ा फैसला और स्पेन की चेतावनी
युद्ध के वैश्विक असर को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने ईरानी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा पर 6 महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार को डर है कि अस्थिरता के कारण ईरानी नागरिक वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी देश नहीं छोड़ेंगे।

उधर, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस जंग को 2003 के इराक युद्ध से भी अधिक खतरनाक बताया है। उन्होंने संसद में कहा कि यह संकट केवल भौगोलिक नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।
ईरान के भीतर भुखमरी और दमन का दौर
ईरान में नवरोज (नया साल) का त्योहार फीका पड़ गया है।
  1. आर्थिक बदहाली: सालाना महंगाई 70% के पार जा चुकी है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतें 100% तक बढ़ गई हैं। तेहरान के बाजारों में सन्नाटा है और व्यापार सामान्य से एक-तिहाई रह गया है।
  2. इंटरनेट और सेंसरशिप: लंबे समय से इंटरनेट बंदी ने सूचनाओं के प्रवाह को रोक दिया है।
  3. कठोर कार्रवाई: सरकार विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सख्त रुख अपना रही है। हाल के दिनों में कई लोगों को गिरफ्तार कर फांसी दी गई है। सरकार ने चेतावनी दी है कि सड़कों पर उतरने वालों को ‘देश का दुश्मन’ माना जाएगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह तनाव संकेत दे रहा है कि यदि कूटनीतिक प्रयास जल्द सफल नहीं हुए, तो यह संघर्ष एक ऐसे विश्वव्यापी संकट का रूप ले लेगा जिससे उबरना दशकों तक मुमकिन नहीं होगा।