Varanasi News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के साथ मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण मिशन की शुरुआत की। उनका यह दौरा केवल आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के लिए ‘मैनेजमेंट गुरु’ की भूमिका निभाने जैसा रहा।
काशी के ‘मैनेजमेंट मॉडल’ से सजेगा उज्जैन सिंहस्थ
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम के अधिकारियों और सीईओ के साथ लंबी चर्चा की और मंदिर की SOP (Standard Operating Procedure) को बारीकी से समझा।
भीड़ प्रबंधन का मंत्र: मंदिर परिसर में 115 विग्रह हैं, जिनमें 14 प्रधान महादेव शामिल हैं। श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यमों और बुकलेट से इनके महत्व के बारे में बताकर भीड़ को अलग-अलग स्थानों पर डाइवर्ट किया जाता है।
तकनीक का उपयोग: सीएम यादव ने इन जानकारियों को संकलित करने के निर्देश दिए ताकि शिप्रा तट पर होने वाले सिंहस्थ कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन के दौरान सुगम दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
प्रतिस्पर्धा नहीं, राज्यों के बीच ‘सहयोग और सौहार्द’ का युग
वाराणसी एयरपोर्ट पर यूपी के कैबिनेट मंत्रियों द्वारा भव्य स्वागत के बाद मुख्यमंत्री ने दो राज्यों के बीच होने वाले ‘सहयोग सम्मेलन’ में हिस्सा लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब राज्यों के बीच एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ (प्रतिस्पर्धा) का नहीं, बल्कि सहयोग और सौहार्द का समय है।
“उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ऊर्जा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। काशी और उज्जैन का रिश्ता सदियों पुराना है, जिसे अब आधुनिक विकास से जोड़ा जा रहा है।” – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
धार्मिक पर्यटन: समाज और इकॉनमी बदलने का नया आधार
सीएम यादव ने एक दूरदर्शी दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदलने की क्षमता है।
रोजगार के अवसर: स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर और MSME उद्योगों को जोड़कर युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किए जा सकते हैं।
उज्जैन का उदाहरण: ‘महाकाल लोक’ के लोकार्पण के बाद उज्जैन की स्थानीय अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आया है। ठीक इसी तरह काशी कॉरिडोर के निर्माण के बाद वाराणसी में श्रद्धालुओं की संख्या और व्यापार में भारी वृद्धि हुई है, जो पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल है।
सम्राट विक्रमादित्य की विरासत और आगामी आयोजन
अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
भव्य नाट्य मंचन: उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल के बीच सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनकी न्यायप्रिय शासन व्यवस्था पर आधारित एक भव्य नाटक का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
एमपी में निवेश के लिए निमंत्रण
वाराणसी में मौजूद उत्तर प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के सामने सीएम ने मध्य प्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, मजबूत अधोसंरचना (Infrastructure) और प्रोत्साहन तंत्र को भी प्रस्तुत किया। उन्होंने यूपी के उद्यमियों और निवेशकों को मध्य प्रदेश आने का न्योता दिया।
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह वाराणसी दौरा धार्मिक आस्था, प्रशासनिक प्रबंधन और आर्थिक विकास का एक अनूठा संगम रहा। काशी से सीखे गए ‘मैनेजमेंट के पाठ’ निश्चित रूप से 2028 के सिंहस्थ को एक वैश्विक मानक प्रदान करेंगे।