Dhar/Indore News: मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। बुधवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली प्रस्तावित सुनवाई टल गई है।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस मामले की प्रक्रिया मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ही जारी रहेगी। अब सबकी नजरें 2 अप्रैल को इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में होने वाली अहम सुनवाई पर टिकी हैं।
मुस्लिम पक्ष की याचिका और वीडियोग्राफी की मांग
सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब मुस्लिम पक्ष की ओर से ‘कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी’ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुस्लिम पक्ष की मुख्य मांग यह है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 11 मार्च को किए गए प्रारंभिक सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी उन्हें उपलब्ध कराई जाए।
इससे पहले 16 मार्च को हाईकोर्ट में इस विषय पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिलने के बाद उन्होंने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। मुस्लिम पक्ष चाहता था कि 2 अप्रैल की हाईकोर्ट सुनवाई से पहले उनकी इस मांग पर विचार किया जाए।
हिंदू पक्ष की ‘कैविएट’ से बढ़ा पेच
हिंदू पक्ष भी इस मामले में पूरी तरह मुस्तैद है। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में ‘कैविएट’ दायर कर दी थी। इसका तकनीकी अर्थ यह है कि मुस्लिम पक्ष की किसी भी याचिका पर बिना हिंदू पक्ष की दलील सुने कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अब हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी अपना पक्ष रखेंगे।
हाईकोर्ट न्यायाधीशों का निरीक्षण और वर्तमान स्थिति
भोजशाला मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते 28 मार्च को हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी ने स्वयं भोजशाला परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि 2 अप्रैल की सुनवाई में कोर्ट किसी बड़े और महत्वपूर्ण बिंदु पर आदेश दे सकता है।
निष्कर्ष: धार की भोजशाला में सरस्वती मंदिर और कमाल मौलाना दरगाह को लेकर दशकों पुराने इस विवाद में अब वैज्ञानिक सर्वे और साक्ष्यों की वीडियोग्राफी सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है। कल होने वाली इंदौर हाईकोर्ट की सुनवाई यह तय करेगी कि एएसआई सर्वे की दिशा क्या होगी और दोनों पक्षों को साक्ष्य किस रूप में साझा किए जाएंगे। पूरे प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियां और नागरिक इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।