New Delhi: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में देश ने कर संग्रह के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मार्च 2026 में सकल माल एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन 9 प्रतिशत की शानदार वार्षिक वृद्धि के साथ ₹2,00,344 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
यह पहला मौका है जब मासिक जीएसटी राजस्व ने ₹2 लाख करोड़ के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार किया है। विशेष बात यह है कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) में यह तीसरी बार है जब संग्रह इस ऊंचाई तक पहुंचा है, जो देश की मजबूत आंतरिक खपत और सुव्यवस्थित कर प्रणाली का प्रमाण है।
आयात और घरेलू बाजार का प्रदर्शन
ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि में सबसे बड़ी भूमिका आयात (Imports) की रही है। आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में 17.8 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया, जो बढ़कर ₹53,861 करोड़ हो गया। यह दर्शाता है कि देश की औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। वहीं, घरेलू मोर्चे पर भी स्थिरता बनी रही और 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹1.46 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।
कर दरों में कटौती का ‘मास्टरस्ट्रोक’
इस उपलब्धि की सबसे दिलचस्प कड़ी सरकार की वह रणनीति है, जिसमें टैक्स की दरें घटाने के बावजूद राजस्व में वृद्धि हुई है। सितंबर 2025 में सरकार ने जीएसटी ढांचे में बड़े बदलाव करते हुए लगभग 375 वस्तुओं पर टैक्स कम कर दिया था। कर स्लैब को सरल बनाकर मुख्य रूप से 5% और 18% की श्रेणियों में सीमित किया गया। हालांकि, नवंबर में राजस्व गिरकर ₹1.70 लाख करोड़ पर आ गया था, लेकिन कर अनुपालन (Compliance) में सुधार और व्यापार बढ़ने से संग्रह ने फिर से रफ्तार पकड़ ली।
राज्यों का योगदान: महाराष्ट्र फिर अव्वल
राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो महाराष्ट्र ₹0.13 लाख करोड़ के योगदान के साथ देश में शीर्ष पर बना हुआ है। कर्नाटक और गुजरात ने भी अपनी आर्थिक मजबूती का परिचय देते हुए संग्रह को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में मदद की। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी नेट जीएसटी कलेक्शन में 10 फीसदी की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है।
पूरे वित्त वर्ष का लेखा-जोखा
वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए राजस्व के मोर्चे पर ‘स्वर्ण वर्ष’ साबित हुआ है।
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कुल वार्षिक राजस्व: ₹22.27 लाख करोड़ (8.3% की वृद्धि)।
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सर्वकालिक रिकॉर्ड: अप्रैल 2025 में अब तक का सबसे अधिक ₹2.36 लाख करोड़ का कलेक्शन हुआ था।
अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने
रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन के कई गहरे मायने हैं। यह सिद्ध करता है कि यदि टैक्स की दरें कम और प्रक्रिया सरल हो, तो व्यापार बढ़ता है और सरकारी खजाना अधिक तेजी से भरता है।
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राजकोषीय मजबूती: सरकार के पास विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध होगा।
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उपभोक्ता विश्वास: घरेलू बिक्री में लगातार बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि आम जनता की क्रय शक्ति और भारतीय बाजार पर उनका भरोसा बरकरार है।
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औद्योगिक रफ्तार: आयात में भारी वृद्धि देश के विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों और विस्तार की ओर इशारा करती है।