Bhopal News:मध्यप्रदेश की सियासत में देर रात एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ग्वालियर-चंबल संभाग के कद्दावर नेता और दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है।
नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के चंद घंटों के भीतर ही विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट को रिक्त घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी। इस त्वरित कार्रवाई ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने 2 अप्रैल 2026 को एक पुराने आपराधिक मामले में सुनवाई करते हुए राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया। न्यायालय ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई है।
जैसे ही अदालती आदेश की प्रति भोपाल पहुंची, विधानसभा सचिवालय सक्रिय हो गया। विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने देर रात कार्यालय पहुंचकर वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कीं और सदस्यता समाप्ति का आदेश जारी किया। इसके साथ ही दतिया विधानसभा सीट को आधिकारिक तौर पर रिक्त घोषित कर दिया गया है, जिसकी सूचना अब चुनाव आयोग को भेजी जा रही है।
नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले ‘जायंट किलर’ की विदाई
राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में ‘जायंट किलर’ की छवि बनाई थी। उन्होंने भाजपा सरकार के तत्कालीन कद्दावर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को करीब 8,800 मतों से पराजित किया था।
मिश्रा दतिया से लगातार तीन बार के विधायक थे। भारती की जीत को कांग्रेस की बड़ी उपलब्धियों में गिना गया था, लेकिन अब सदस्यता जाने से कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है।
कानूनी पेंच: क्यों गई सदस्यता?
भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के कड़े प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी मौजूदा सांसद या विधायक को किसी भी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के ‘लिली थॉमस’ मामले के फैसले के बाद अब सजा मिलते ही अयोग्यता लागू हो जाती है। इसी कानूनी प्रावधान की मार राजेंद्र भारती पर पड़ी है।
विपक्ष हमलावर: जीतू पटवारी ने उठाए सवाल
कार्रवाई की खबर मिलते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी देर रात विधानसभा पहुंचे। उन्होंने इस त्वरित कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया। कांग्रेस का आरोप है कि सचिवालय ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना जल्दबाजी में यह आदेश जारी किया है।
कानूनी रडार पर एमपी के अन्य माननीय
राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने के बाद अब अन्य विधायकों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं जो विभिन्न अदालती मामलों का सामना कर रहे हैं:
निर्मला सप्रे (बीना): दलबदल मामले में फंसी हैं। भाजपा के मंच पर दिखने के बाद कांग्रेस उनकी सदस्यता रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में संघर्ष कर रही है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को है।
आरिफ मसूद (भोपाल मध्य): फर्जी सेल डीड मामले में घिरे हैं। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली हुई है, लेकिन मेरिट के आधार पर सुनवाई जारी है।
संजय पाठक (विजयराघवगढ़): माइनिंग से जुड़े गंभीर आरोपों में हाईकोर्ट ने आपराधिक शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
गौतम टेटवाल (सारंगपुर): राज्यमंत्री टेटवाल फर्जी जाति प्रमाण पत्र के विवाद में फंसे हैं, मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
अभय मिश्रा (सेमरिया): नामांकन पत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में जबलपुर हाईकोर्ट इनकी पात्रता की जांच कर रहा है।
मुकेश मल्होत्रा (विजयपुर): इनकी सदस्यता को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, लेकिन फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के स्टे के कारण इनकी विधायकी बची हुई है।
दतिया सीट रिक्त होने के बाद अब वहां उपचुनाव की आहट सुनाई देने लगी है। यदि ऊपरी अदालत से राजेंद्र भारती की सजा पर रोक (Stay on Conviction) नहीं लगती, तो दतिया में दोबारा चुनावी रण सजना तय है।