धार भोजशाला विवाद: इंदौर हाईकोर्ट में आज से सुनवाई शुरू, ASI की रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर रखी जाएंगी दलीलें

Dhar/Indore: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले धार भोजशाला विवाद में आज, 6 अप्रैल 2026 से एक नया और निर्णायक अध्याय शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले की अब नियमित (डेली) सुनवाई होगी।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ सोमवार दोपहर 2:30 बजे से सभी याचिकाओं पर एक साथ विचार करेगी। आज की सुनवाई के लिए इस संवेदनशील मामले को कार्यसूची (लिस्टिंग) में 41वें नंबर पर रखा गया है।
सुनवाई का मुख्य केंद्र: ASI सर्वे और आपत्तियां
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट कर दी थी। अदालती प्रक्रिया के अनुसार, सबसे पहले मुख्य याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे। इसके बाद, जिन पक्षों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उन्हें अपनी दलीलें रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले सप्ताह इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अब अंतिम निर्णय का अधिकार हाईकोर्ट के पास ही है। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि ASI द्वारा पेश की गई विस्तृत सर्वे रिपोर्ट, स्थल की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी को साक्ष्य के तौर पर गंभीरता से परखा जाए। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नया तथ्य या आपत्ति सामने आती है, तो हाईकोर्ट उस पर भी विचार करने के लिए स्वतंत्र है।
सर्वे रिपोर्ट में क्या है खास?
हाईकोर्ट में पेश की गई ASI की रिपोर्ट इस विवाद की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। सर्वे के दौरान कई चौंकाने वाले ऐतिहासिक प्रमाण सामने आए हैं:
  • स्थापत्य कला: परिसर में कुल 106 स्तंभ मिले हैं, जिन पर बारीक नक्काशी और विशिष्ट डिजाइन मौजूद हैं।
  • महत्वपूर्ण शिलालेख: सर्वे में 32 शिलालेख पाए गए हैं। इनमें राजा भोज के काल की साहित्यिक रचनाओं का उल्लेख है। विशेष रूप से राजा अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के अंश पत्थरों पर उत्कीर्ण मिले हैं।
  • ऐतिहासिक कालक्रम: रिपोर्ट 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच परमार वंश के शासनकाल के निर्माण कार्यों की पुष्टि करती है। साथ ही, इसमें 14वीं शताब्दी के अंत में मालवा में मुस्लिम शासन की स्थापना और दिलावर खान (हुसैन) के आगमन से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य भी दर्ज हैं।
विद्वान वकीलों की मौजूदगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों ने दिग्गज कानूनी विशेषज्ञों को मैदान में उतारा है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी भौतिक रूप से उपस्थित रहकर अपना पक्ष रखेंगे। वहीं, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से दिग्गज वकील सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दलीलें पेश करेंगे।
यथास्थिति और परंपरा का पालन
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि जब तक हाईकोर्ट किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुँचता, तब तक भोजशाला परिसर के भौतिक स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी किया गया वह आदेश प्रभावी रहेगा, जिसके तहत हिंदू पक्ष को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है।
निष्कर्ष: आज से शुरू हो रही यह दैनिक सुनवाई न केवल धार बल्कि पूरे देश की नजरों में है। ASI की वैज्ञानिक रिपोर्ट और ऐतिहासिक शिलालेखों के आधार पर यह तय होगा कि इस विवादित परिसर का भविष्य क्या होगा। हाईकोर्ट की सक्रियता और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद अब इस दशकों पुराने विवाद के कानूनी समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।