Ashoknagar News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में रविवार को आयोजित एक जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग और बेहद संवेदनशील रूप देखने को मिला। जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर रहने वाले सिंधिया उस समय आपा खो बैठे, जब उन्होंने देखा कि लोगों द्वारा दिए गए आवेदनों को बेहद लापरवाही से संभाला जा रहा है। उन्होंने मंच से ही जिले के कलेक्टर साकेत मालवीय को सख्त लहजे में फटकार लगाई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या था पूरा मामला?
सूत्रो के अनुसार ये मामला जनपद पंचायत अशोकनगर में आयोजित जनसुनवाई के समापन के समय का है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब जनता द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्रों और आवेदनों को समेटा जा रहा था, तब कलेक्टर साकेत मालवीय उन्हें बेतरतीब और अव्यवस्थित तरीके से एक थैले में भर रहे थे। यह दृश्य जैसे ही सिंधिया की नजरों में आया, वे खुद को रोक नहीं पाए और मंच से ही कलेक्टर को टोक दिया।
सिंधिया की दो टूक: “यह कागज नहीं, सोना है”
प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए सिंधिया ने कलेक्टर से कहा— “ये कागज के टुकड़े नहीं हैं, ये लोगों की उम्मीदें हैं… हमारे लिए यह सोने के समान कीमती हैं।” सिंधिया ने आगे भावुक होते हुए कहा कि जनसुनवाई में आने वाला हर व्यक्ति बड़ी उम्मीद लेकर आता है। ये आवेदन सिर्फ सरकारी फाइलों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे किसी की पीड़ा, किसी का लंबा संघर्ष और किसी के परिवार का भविष्य छिपा होता है। इन्हें इस तरह लापरवाही से रखना आम जनता की भावनाओं और उनके भरोसे का अपमान करना है।
अधिकारियों को मिला कड़ा संदेश
केंद्रीय मंत्री की इस तल्ख टिप्पणी के बाद कार्यक्रम स्थल पर सन्नाटा पसर गया। कलेक्टर ने तुरंत अपनी गलती सुधारी और सभी आवेदनों को व्यवस्थित तरीके से सहेजना शुरू किया। सिंधिया ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जिम्मेदारी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें मानवीय संवेदना और सम्मान का होना भी अनिवार्य है।
निष्कर्ष: ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह रुख प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है। यह घटना संदेश देती है कि लोकतंत्र में जनता द्वारा दी गई हर अर्जी ‘पवित्र’ है और अधिकारियों को उसे फाइलों के बोझ के बजाय एक जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए। सिंधिया की इस संवेदनशीलता की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है।