Indore News: इंदौर में नगर निगम के बजट सत्र के दौरान बुधवार को ‘वंदे मातरम’ के गान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रणक्षेत्र में बदल गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से पूछा है कि कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वह देशभक्तों के साथ खड़ी है या देशद्रोहियों के साथ।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार को इंदौर नगर निगम में बजट पर चर्चा होनी थी। सदन की कार्यवाही के दौरान नियमानुसार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन शुरू हुआ। आरोप है कि कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल ने गीत गाने से न सिर्फ इनकार किया, बल्कि विरोध भी दर्ज कराया। फौजिया शेख ने सभापति से उस कानून या ‘एक्ट’ की मांग की, जिसके तहत वंदे मातरम गाना अनिवार्य है।
इस व्यवहार से भाजपा पार्षद आक्रोशित हो गए और सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ते देख सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया। वहीं, सदन के बाहर रुबीना इकबाल के एक विवादित बयान ने आग में घी डालने का काम किया, जिसमें उन्होंने तीखे शब्दों का प्रयोग किया।
महापौर का कड़ा प्रहार
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “किसी भी पंथ या धार्मिक मान्यता से बड़ा देश होता है। राष्ट्रगीत का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कोई इसे गाए या न गाए, यह व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है, लेकिन उसका अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है।”
उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व को घेरते हुए कहा कि जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि विवादित बयान देने वाले नेताओं पर कांग्रेस को तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
‘दादागीरी नहीं सहेंगे…
सदन में हुए हंगामे के बाद कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल ने मीडिया के सामने आकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने भाजपा पर ‘दादागीरी’ का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव में अपनी धार्मिक मान्यताओं से समझौता नहीं करेंगी। मीडिया से चर्चा के दौरान रुबीना इकबाल ने भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “एक इंसान को बोलो कि ये खा ले और दूसरे को बोलो कि ये निगल ले… इन दोनों बातों के लहजे में बहुत फर्क होता है।” उन्होंने आगे कहा कि हमसे यह कहना कि ‘यहाँ रहना होगा तो वंदे मातरम कहना होगा’, सरासर दादागीरी है। हम किसी के बाप की दादागीरी नहीं सुनते और न ही दबाव में कोई बात मानेंगे।
धार्मिक मान्यताओं और देशभक्ति का तर्क
वंदे मातरम न गाने के पीछे धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए रुबीना ने कहा, “हमारे इस्लाम में वंदे मातरम बोलना मना है। अगर मना है, तो मना है।” हालांकि, उन्होंने अपनी देशभक्ति को प्रमाणित करते हुए यह भी जोड़ा कि वे ‘जन गण मन’ और ‘सारे जहाँ से अच्छा’ जैसे गीतों का पूरा सम्मान करती हैं और उन्हें गाती भी हैं। उन्होंने तीखे सवाल पूछते हुए कहा, “हमने देश को सम्मान कब नहीं दिया? मुझे इनकी (भाजपा की) दोगली नीतियों से नफरत है।”
कार्यवाही की तैयारी और कांग्रेस का बचाव
भाजपा पार्षदों ने इस मामले को राष्ट्र का अपमान बताते हुए पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, विवाद बढ़ता देख कांग्रेस संगठन रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के मीडिया एडवाइजर के.के. मिश्रा ने शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे को रुबीना खान को पार्टी से बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं।
यह विवाद अब केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रवाद बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता की एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है।