वंदे मातरम विवाद: पार्षद फौजिया का मुंह काला करने पर 51 हजार का इनाम

Indore News: इंदौर नगर निगम के बजट सत्र से शुरू हुआ ‘वंदे मातरम’ विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर कट्टरपंथी मोड़ ले चुका है। 8 अप्रैल को शुरू हुए इस विवाद में अब हिंदू संगठनों की एंट्री हो गई है, जिससे शहर का माहौल गरमा गया है।

इनाम की घोषणा से मचा हड़कंप

हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट साझा कर हलचल मचा दी है। उन्होंने घोषणा की है कि जो भी महिला (बहन) वंदे मातरम का अपमान करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम का मुंह काला करेगी, उसे संगठन की ओर से 51 हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद से पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

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विवाद की जड़: क्या हुआ था सदन में?

यह पूरा मामला 8 अप्रैल को नगर निगम के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन के समय पार्षद फौजिया सदन में मौजूद नहीं थीं और गान समाप्त होने के बाद देरी से पहुंचीं। इस पर बीजेपी पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर राष्ट्रगीत से दूरी बनाई।

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जवाब में फौजिया ने कहा, “वंदे मातरम गाना कोई जबरदस्ती नहीं है, संविधान में ऐसा कहीं नहीं लिखा।” इस बयान के बाद भारी हंगामा हुआ और सभापति ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया।

कांग्रेस में आंतरिक कलह और निष्कासन

विवाद तब और बढ़ गया जब एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने फौजिया का बचाव करते हुए तीखे बयान दिए। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि “किसी के बाप में हिम्मत नहीं है जो जबरदस्ती वंदे मातरम गवाए।” उन्होंने अपनी ही पार्टी पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को केवल मुसलमानों के वोट चाहिए।

इस बयानबाजी का नतीजा यह हुआ कि:

  • बीजेपी ने दोनों पार्षदों के खिलाफ FIR और निष्कासन की मांग को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

  • कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने रुबीना को पार्टी से निकालने के लिए प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखा।

  • कांग्रेस ने अब अपने हर कार्यक्रम में वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया है।

निष्कर्ष…

एक तरफ जहां बीजेपी इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर दोफाड़ नजर आ रही है। हिंदू संगठन की इस इनामी घोषणा ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है, जिससे इंदौर की राजनीति में उबाल आ गया है।